Wednesday, 23 June 2021

Brahma Kumaris Murli 24 June 2021 (HINDI) Madhuban BK Murli Today

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – 24 June 2021

 24-06-2021 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन

BK Murli is available to 'read' and to 'listen' Daily Murli in Hindi and English.'' Om Shanti. Shiv baba ke madhur Mahavakya. Brahma Kumaris BaapDada ki murli. Bk Murli Audio recorded by service team of sisters of bkdrluhar.com website


(मातेश्वरी जी के पुण्य स्मृति दिवस पर क्लास में सुनाने के लिए जगदम्बा सरस्वती जी के मधुर महावाक्य)

गीत:-

छोड़ दे जग से नाते .....

अगर हम जग से नाते ही छोड़ दें तो फिर जग काहे के लिये है? अगर नाते ही तोड़ने की बात है तो फिर यह सम्बन्ध बनाया ही क्यों? पति-पत्नी, बाप-बेटा, राजा-प्रजा आदि आदि अनेकानेक जो सम्बन्ध हैं, यह सब भगवान ने रचे हैं, ऐसे कहते है ना! तो जब भगवान ने रचे हैं तो फिर क्यों कहते हैं छोड़ो! या फिर यह गीत ही राँग है।

Brahma Kumaris Murli 24 June 2021 (HINDI)
Brahma Kumaris Murli 24 June 2021 (HINDI) 

भगवान ने कौन-सा जग रचा? जग कहो, दुनिया कहो, जो भगवान ने रची वह ऐसी दुनिया थोड़ेही रची, जो छोड़नी पड़े। अभी के जो सम्बन्ध हैं, वह नहीं रचे। अभी इस जग में देखो तुम्हारे नाते कैसे हो गये हैं! कर्मों के कारण तमोप्रधानता में आते-आते क्या हो गये हैं! कर्मों के बन्धन एक दो को कांटते रहते हैं। सभी नाते इस कर्म के हिसाब में तमोप्रधानता में आ करके, एक दो को दु:ख देते और लेते रहते हैं। भगवान खुद कहते हैं मैंने तो तुम्हारे यह दु:ख के सम्बन्ध नहीं बनाये हैं। मैंने जो तुम्हारा सम्बन्ध जोड़ा था, वह बन्धन नहीं था। मैंने तुम्हारा श्रेष्ठ सम्बन्ध जोड़ा था, उसी सम्बन्ध में तुम सदा सुखी थे। तुम्हारे सब नाते बहुत स्वच्छ थे इसलिए याद करते हो ना - राम राजा, राम प्रजा, राम साहूकार है, बसे नगरी जिये दाता धर्म का उपकार है.... उसको कहते थे गृहस्थ धर्म। धर्म-पति, धर्म-पत्नी, धर्म के नाम से है ना। परन्तु अभी तो वह धर्म का सम्बन्ध नहीं है। प्रैक्टिकल वह जीवन नहीं रही है, इसलिये बाप कहते हैं यह जो तुमने अपना जग बना दिया है, उस जग के जो नाते हैं वह बिगड़ गये हैं। मैने जो जग बनाया था उसमें तुम्हारे नाते कितने अच्छे थे, कितने प्रिय थे, कितना एक दो को सुख देने वाले थे। नाते तो जरूर थे, ऐसे नहीं कि भगवान ने नाते नहीं रचे। नाते तो थे लेकिन वह नाते कर्म के बन्धन के बिना थे, इसलिए उन्हों को कहा जाता था जीवनमुक्त। जीवन में इस कर्म के बन्धन (दु:ख) से मुक्त थे, इसलिये उनको कहते थे जीवनमुक्त। अभी तुम्हारे नाते जीवनबन्ध के बन गये हैं इसलिये कहते हैं अभी उससे छुटकारा कैसे हो! बाप कहते हैं उससे नाता तोड़ एक मेरे से जोड़। यह एक ही लास्ट की जीवन तुम मेरे हवाले करो। मेरे हवाले का मतलब है जैसे स्त्री पति के हवाले, पति स्त्री के हवाले। बाप बेटे के हवाले, बेटा बाप के हवाले.. यह तो प्रैक्टिस अच्छी तरह से है ना। मैं कोई तुम्हें नई बात नहीं कहता हूँ। कैसे करें, क्या करें तुम यह भी प्रश्न पूछ नहीं सकते हो। तुम अपनी जीवन एक दो के प्रति देते आये हो, क्या तुम अपने बच्चों के प्रति अपनी जीवन नहीं दे बैठे हो? अपना तन मन धन जो भी कुछ है, तुम उन्हीं के प्रति तो बनाके बैठे हो ना। अपना अपना तो करते हो ना! सारी जीवन उन्हीं के प्रति लगा देते हो। तो मैं तुम्हें कोई नई बात थोड़ेही कहता हूँ, कि यह सब मेरे हवाले करो। जैसे अभी तक एक दो में करते आये हो, ऐसे अभी कहता हूँ, तुम मेरे बनो। फिर मेरा बन करके उसे ट्रस्टी बन सम्भालो। तुम भक्ति मार्ग में भी कहते आये हो भगवान यह सब तेरा, मैं तेरा... परन्तु तेरा किया नहीं, सिर्फ ऐसे ही कहा कि तेरा। तेरा भी मेरा, मेरा भी मेरा... ऐसे ही सब करते थे। लेकिन अब वह ठगी तो नहीं चलेगी ना! तेरा भी मेरा, तो मेरा भी मेरा। नहीं। अब यह तेरा मेरा खत्म करना पड़ेगा। अभी मैं तेरा तो उसमें सब आ गया। बस, मैं तेरा। बाकी ऐसे थोड़ेही है कि उनका भी मेरा, अपना भी मेरा.. ऐसी ठगी करने का क्या फायदा! क्योंकि हम ही अपने को ठगेंगे, उस परमात्मा को तो कोई ठग नहीं सकता। पहले कैसे-कैसे ठगी करते रहे लेकिन ठगते ठगते खुद ही दु:खी अशान्त बने हो क्योंकि धोखा तो तुम ही खा रहे हो, इसलिये अब बाप कहते हैं वह सब छोड़ो। देह सहित सब सम्बन्धों से बुद्धि हटा करके अभी मेरे से जोड़ो। फिर अपना-पन नहीं रहेगा।

अभी तक मेरा-मेरा कहते दु:खी होते रहते हो। फिर बुद्धि उधर जाती है तो कहते हो क्या करूँ, कैसे करूँ... अगर तुम किसी में लटकेंगे तो नतीजा क्या होगा! यह मोह जो है ना, इसके कारण तुम दु:खी बन पड़े हो इसलिए बाप कहते हैं तुम इस जग के नाते तोड़ करके अभी मेरे बनो। तो यह जो तुमने अपने देह के बन्धन, जीवन के बन्धन बनाये हैं, उनसे निकल करके अभी मेरे बन जाओ। फिर मैं कोई तुम्हारे साथ जन्म-जन्म थोड़ेही चलता रहूँगा। नहीं। अभी मेरा तुम्हारे से काम है, बस। फिर तो तुम आत्मायें आपस में सदाकाल के सुख में चलती चलेंगी। तो तुम्हारे दु:ख के बन्धन काट करके, सुख का सम्बन्ध बना देता हूँ फिर तुम ही आपस में सुख भोगेंगे। अभी देखो तुम कितने बिगड़ गये हो इसलिये दु:खी होते हो। फिर मैं तुम्हारा बिगड़ा हुआ सुधारता हूँ, फिर तुम ही सुखी रहेंगे। मैं थोड़ेही जन्म-जन्म तुम्हारे साथ चलने वाला हूँ। मैं तो सिर्फ तुम्हारी बिगड़ी को संवारने के लिये कहता हूँ, अभी मेरे बनो। सो भी क्यों कहता हूँ? क्योंकि मेरे फरमान पर चलने से तुम्हारे लिए सब सहज हो जायेगा। मैं तुम्हें यह सहज युक्ति देता है। तुम प्रैक्टिकल में मेरे हो करके चलो, तो यह युक्ति काम में आवे। जैसे कोई किसी के गोद का बच्चा होता है फिर उनका ही नाम प्रैक्टिकल चलेगा ना। ऐसे तुम भी प्रैक्टिकल मेरे हो करके चलने से तुम्हारा ही भाग्य बनेगा। बाप तो बड़ी सीधी, सहज, एकदम सिम्पल बातें बतलाते हैं, उसे भी देखो कोटों में कोई ही धारण करने वाले निकलते हैं।

बाप कहते हैं इस छोटे से संगमयुग में तुम्हारे देश, इस कार्पोरियल दुनिया में तुम्हारे लिये ही आया हूँ, तो कम से कम जितना टाइम है उतना टाइम तो कुछ हमारा ख्याल करो। बाबा के बने हो तो कम से कम इतना टाइम तो शुद्ध रहो। फिर तो तुम्हारी ऐसी प्रालब्ध बन जायेगी जो तुम्हें उस दुनिया में मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। अभी थोड़ी मेहनत की बात है, अभी तुम कैसे भी करके, मर मिट करके भी पवित्र रहने की प्रतिज्ञा करो। अपनी दृढ़ता रखो, अपनी धारणाओं में रहने का पूरा प्रयत्न करो। बाप तुम्हें साफ-साफ बतलाते हैं तुम सिर्फ इतने थोड़े टाइम के लिए यह मेहनत करो। मैं तुम्हें और कोई मेहनत नहीं कराता हूँ, तुम्हें जितना मिलता है उसकी भेंट में कोई मेहनत ही नहीं है।

अभी घी के घड़े मत बनाओ.. यह करूँगा, वह करूँगा, दुनिया क्या कहेगी, वह क्या कहेंगे, अरे दुनिया क्या कहेगी... छोड़ दो इसे। अभी यह दुनियां ही जाने वाली है। लेकिन उन बिचारों को यह पता थोड़ेही है इसलिये बाप कहते हैं यह मत सोचो। अब तो मौत सामने खड़ा है। तुम इतना लम्बा-चौड़ा जो बनाकर बैठे हो यह सब वेस्टेज़ कर रहे हो। अभी बाप कहते हैं उस वेस्टेज़ को बचाओ। इस शरीर निर्वाह के लिये जितना चाहिए उतना भले करो, जितना तुम्हारा क्रियेशन के साथ हिसाब-किताब है, उतना करो, मैं कहाँ सम्भालूँगा। इसे तुमको ही सम्भालना है। जो जरूरी है वह तो तुमको फ्री करता हूँ, लेकिन अभी यह जो एक्स्ट्रा रच रहे हो उसके लिये मना करता हूँ क्योंकि अभी वह तो गिरना ही है क्यों अपना फालतू समय गंवा रहे हो। इन फालतू के झंझटों से ही तुम दु:खी हुए हो, उन झंझटों से तुम कैसे छूटो, वही तो तुम्हें बतलाता हूँ। फिर भी बैठ करके अनेक बहाने लगाना, यह कहाँ की रीति है? फिर बाप भी कहते हैं कि देख लेना, अभी अगर मुझे सीधी अंगुली नहीं देते हो, हाथ नहीं देते हो, तो फिर मैं ऐसे नाक पकड़के ले चलूँगा। नाक पकड़ेगा तो फिर दम घुटेगा, फिर दु:ख होगा, सज़ायें खानी पड़ेंगी ना! इसलिये कहते हैं अभी हाथ में हाथ देकर सीधा चलने का टाइम आ गया है। अगर सीधी तरह से नहीं चलेंगे तो फिर मेरे हाथ में तुम्हारा नाक भी तो आयेगा, फिर देख लेना। फिर उस समय कुछ नहीं हो सकेगा, न कुछ कर सकेंगे इसलिए बाप कहते हैं बच्चे, अब तुम मेरे हो करके, मेरे पास आ करके, मेरी बातों को सुन करके, अगर फिर भी कुछ नहीं किया तो उनके लिये बहुत कड़ी सज़ायें हैं, इसलिये जिन बिचारों को पता नहीं उसकी तो बात अलग है। बाकी जिन्हों को पता है, जो बैठके, सुनके फिर इन्हीं बातों में गफलत की तो उनकी तो खैर नहीं। जैसे 10 गुणा फायदा, वैसे 10 गुणा नुकसान होगा। तब कहते हैं अपने नुकसान को, घाटे को.. अच्छी तरह से समझो। अच्छी तरह से कुछ तो अपनी बुद्धि खोलो। अभी बाप से बुद्धियोग लगायेंगे तो ताकत मिलेगी। तो इन सभी बातों को समझो, भूलो मत।

अभी यह जो समय चल रहा है, इसे पहचानो, जरा आंखे खोलो, बुद्धि खोलो और समय का पूरा फायदा लो। अपनी पूरी तकदीर जगाओ। कहते भी हैं जैसा संग वैसा रंग होता है, इसलिये जिसमें अभी यह धारणा पूरी नहीं होगी तो माया के संग का रंग लग जायेगा, तब तो कहते हैं हियर नो इविल, सी नो इविल, टॉक नो इविल... कई ऐसे इविल्स हैं जो यहाँ भी कईयों को छोड़ते नहीं हैं, फिर एक दो के संगदोष में आ जाते हैं। तो कहते हैं ऐसे संगदोष से बचे रहो। ऐसे मत समझो कि संगदोष बाहर है, यहाँ नहीं है। नहीं, यहाँ भी वह घूमते रहते हैं, क्योंकि उनका राज्य है ना, इसलिये बाप कहते हैं अच्छी तरह से कवच पहनकर रहो। कवच होगा तो उसकी गोली लगेगी नहीं। योग का ही कवच है, ज्ञान की तलवार है। इन सभी अस्त्र-शस्त्रों को अपने पास अच्छी तरह से सम्भालके रखो।

कहते भी हैं जो करता है वह पाता है, यह तो भविष्य प्रालब्ध बनाने की बातें हैं। यहाँ तो प्रालब्ध नहीं भोगनी है ना, यहाँ तो कोई गुरू बन करके नहीं बैठना है। इसमें कोई मिसअण्डरस्टैण्ड न करे, इसलिये यह सब समझाया जाता है। तो यह सब बातें ध्यान में रख करके अपने को सेफ रखना है। यहाँ कोई खर्चे आदि की बात नहीं होनी चाहिए। अभी यह सब खर्चा दूसरों के कल्याणार्थ ही यूज़ करना है। एक एक पाई भी सब इसी कार्य में लगाना है। अच्छा!

दूसरी मुरली :-
“चढ़ती कला में जाना है तो अपने जीवन की सारी जवाबदारी उनके हाथ में समर्पण कर दो''
बहुत मनुष्य ऐसा प्रश्न पूछते हैं, इतना ज्ञान सुनते हुए भी हमारी अवस्था आगे क्यों नहीं बढ़ती? आगे बढ़ने में रूकावट क्यों? अब यह समझानी उन्हों के प्रति दी जाती है जिन्हों ने इस मार्ग में चलने का कदम रखा है, परन्तु जब तक अपनी जीवन मन-वाणी-कर्म सहित सरेण्डर कर इनका नहीं हुआ है तब तक वह अतीन्द्रिय सुख महसूस हो नहीं सकता। यह एक ईश्वरीय लॉ है, जब उनका सहारा लिया है तो दिल से उसके आगे जीवन अर्पण कर देनी है अर्थात् पूरा वारिस बन वर्सा लेना है। तो इस नशे में रहने से उस अवस्था में उल्हास भर जाता है और फिर ज्ञान की धारणा होने से औरों को आप समान बनाने की ताकत आयेगी। बाकी ऐसे नहीं समझना कि मानसिक रूप से हम अर्पण हो चुके हैं नहीं, यह तो अपने को ठगना है। जब बाबा प्रैक्टिकल में आया हुआ है तो बच्चा भी प्रैक्टिकल में बनो, फिर बाबा उनके जन्म-पत्री को जान कैसे भी डायरेक्शन देकर चलावे। उसमें पहले घुटका आयेगा, परन्तु अन्त में समझेंगे कि इसमें ही हमारी चढ़ती कला है। तो अपने जीवन की सारी जवाबदारी उनके हाथ में समर्पण करनी है। बाकी गुरू पिछाड़ी गुरू बन कोई उनकी गद्दी पर नहीं बैठना है। अब इन सभी बातों को बुद्धि में रखो तब ही अवस्था ऊंची जा सकती है। अगर ऊंच नहीं चढ़ते हो तो जरूर अपनी ही दिल अथवा धारणा में कोई कालापन है। समझा। अच्छा। मीठे मीठे बच्चों को यादप्यार, गुडमार्निंग।

वरदान:-

अपने श्रेष्ठ स्वरूप वा श्रेष्ठ नशे में स्थित रह अलौकिकता का अनुभव कराने वाले अन्तर्मुखी भव

जैसे सितारों के संगठन में विशेष सितारों की चमक दूर से ही न्यारी प्यारी लगती है, ऐसे आप सितारे साधारण आत्माओं के बीच में एक विशेष आत्मा दिखाई दो, साधारण रूप में होते असाधारण वा अलौकिक स्थिति हो तो संगठन के बीच में अल्लाह लोग दिखाई पड़ेंगे, इसके लिए अन्तर्मुखी बनकर फिर बाहरमुखता में आने का अभ्यास हो। सदैव अपने श्रेष्ठ स्वरूप वा नशे में स्थित होकर, नॉलेजफुल के साथ पावरफुल बनकर नॉलेज दो तब अनेक आत्माओं को अनुभवी बना सकेंगे।

स्लोगन:-

रावण की जायदाद साथ में रख ली तो दिल में दिलाराम ठहर नहीं सकता। 


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