Sunday, 10 January 2021

Brahma Kumaris Murli 11 January 2021 (HINDI) Madhuban BK Murli Today

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – 11 January 2021

 11-01-2021 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन

BK Murli is available to 'read' and to 'listen' Daily Murli in Hindi and English.'' Om Shanti. Shiv baba ke madhur Mahavakya. Brahma Kumaris BaapDada ki murli. Bk Murli Audio recorded by service team of sisters of bkdrluhar.com website


"मीठे बच्चे - मोस्ट बील्वेड शिवबाबा आये हैं तुम बच्चों को विश्व का मालिक बनाने, तुम उनकी श्रीमत पर चलो''

प्रश्नः-

मनुष्य परमात्मा के बारे में कौनसी दो बातें एक-दूसरे से भिन्न बोलते हैं?

उत्तर:-

एक ओर कहते - परमात्मा अखण्ड ज्योति है और दूसरी ओर कहते वह तो नाम-रूप से न्यारा है। यह दोनों बातें एक-दूसरे से भिन्न हो जाती हैं। यथार्थ रूप से न जानने कारण ही पतित बनते जाते हैं। बाप जब आते हैं तो अपनी सही पहचान देते हैं।

गीत:-

मरना तेरी गली में........

Brahma Kumaris Murli 11 January 2021 (HINDI)
Brahma Kumaris Murli 11 January 2021 (HINDI)

ओम् शान्ति

बच्चों ने गीत सुना। जब कोई मरते हैं तो बाप के पास जन्म लेंगे। कहने में यही आता है कि बाप के पास जन्म लिया, माँ का नाम नहीं लेंगे। बधाईयाँ बाप को दी जाती हैं। अभी तुम बच्चे जानते हो हम आत्मायें हैं, वह हो गई शरीर की बात। एक शरीर छोड़ फिर दूसरे बाप के पास जाते हैं। तुमने 84 जन्मों में 84 साकारी बाप किये हैं। वास्तव में असुल हो निराकार बाप के बच्चे। तुम आत्मा परमपिता परमात्मा के बच्चे हो। रहने वाले भी वहाँ के हो जिसको निर्वाणधाम वा शान्तिधाम कहते हैं। असुल तुम वहाँ के रहने वाले हो। बाप भी वहाँ रहते हैं। यहाँ आकर तुम लौकिक बाप के बच्चे बनते हो तो फिर उस बाप को भूल जाते हो। सतयुग में भी तुम सुखी बन जाते हो तो उस पारलौकिक बाप को भूल जाते हो। सुख में उस बाप का कोई सिमरण नहीं करते हैं। दु:ख में याद करते हैं। और याद भी आत्मा करती है। जब लौकिक बाप को याद करते हैं तो बुद्धि शरीर तरफ रहती है। यह बाबा उनको याद करेंगे तो कहेंगे ओ बाबा। हैं दोनों बाबा। राइट अक्षर बाबा ही है। यह भी फादर, वह भी फादर। आत्मा उस रूहानी बाप को याद करती है तो बुद्धि वहाँ जाती है। यह बाप बैठ बच्चों को समझाते हैं। अभी तुम यह जानते हो बाबा आया हुआ है, हमको अपना बनाया है। बाप कहते हैं पहले-पहले हमने तुमको स्वर्ग में भेजा। तुम बहुत-बहुत साहूकार थे फिर 84 जन्म ले ड्रामा प्लैन अनुसार अभी तुम दु:खी हुए हो। अब ड्रामा अनुसार पुरानी दुनिया खत्म होनी है। तुम्हारी आत्मा और शरीर रूपी वस्त्र सतोप्रधान थे फिर गोल्डन एज से सिलवर एज में आत्मा आई तो शरीर भी सिलवर एज में आया फिर कॉपर एज में आया। अभी तो तुम्हारी आत्मा बिल्कुल ही पतित हो गई है तो शरीर भी पतित है। जैसे 14 कैरेट का सोना कोई पसन्द नहीं करते हैं। काला पड़ जाता है। तुम भी अभी काले आइरन एजेड बन गये हो। अब आत्मा और शरीर जो ऐसे काले बन गये हैं तो फिर प्योर कैसे बनें। आत्मा प्योर बने तो शरीर भी प्योर मिले। वह कैसे होगा? क्या गंगा स्नान करने से? नहीं। पुकारते ही हैं - हे पतित-पावन... यह आत्मा कहती है। बुद्धि पारलौकिक बाप तरफ चली जाती है - हे बाबा। देखो बाबा अक्षर ही कितना मीठा है। भारत में ही बाबा-बाबा कहते हैं। अभी तुम आत्म-अभिमानी बन बाबा के बने हो। बाप कहते हैं मैंने तुमको स्वर्ग में भेजा था। नया शरीर धारण किया था। अब तुम क्या बन गये हो। यह बातें हमेशा अन्दर रहनी चाहिए। बाबा को ही याद करना चाहिए। याद भी करते हैं ना - हे बाबा हम आत्मायें पतित बन गई हैं। अब आप आकर पावन बनाओ। ड्रामा में भी यह पार्ट है तब तो बुलाते हैं। ड्रामा प्लैन अनुसार आयेंगे भी तब जब पुरानी दुनिया से नई बननी है तो जरूर संगम पर ही आयेंगे।

तुम बच्चों को निश्चय है बील्वेड मोस्ट बाबा है। कहते भी हैं स्वीट, स्वीटर, स्वीटेस्ट। अब स्वीट कौन है? लौकिक सम्बन्ध में पहले है फादर, जो जन्म देते हैं। फिर टीचर। वह अच्छा होता है। उससे पढ़कर मर्तबा पाते हो। नॉलेज इज़ सोर्स ऑफ इनकम कहा जाता है। ज्ञान है नॉलेज। योग है याद। तो बेहद का बाप जिसने तुमको स्वर्ग का मालिक बनाया था, उनको तुम अभी भूल गये हो। शिवबाबा कैसे आया किसको पता नहीं। चित्रों में भी क्लीयर दिखाया है। ब्रह्मा द्वारा स्थापना शिवबाबा कराते हैं। कृष्ण कैसे राजयोग सिखायेगा? राजयोग सिखलाते ही हैं सतयुग के लिए। तो जरूर संगम पर बाप ने ही सिखाया होगा। सतयुग की स्थापना करने वाला है बाबा। शिवबाबा इन द्वारा कराते हैं, करनकरावनहार है ना। वो लोग त्रिमूर्ति ब्रह्मा कह देते हैं। ऊंच ते ऊंच शिव है ना। यह साकार है, वह निराकार है। सृष्टि भी यहाँ ही है। इस सृष्टि का ही चक्र है जो फिरता रहता है, रिपीट होता रहता है। सूक्ष्मवतन की सृष्टि का चक्र नहीं गाया जाता है। वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी मनुष्यों की रिपीट होती है। सूक्ष्मवतन में कोई चक्र आदि नहीं होता। गाते भी हैं वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी रिपीट। वह यहाँ की बात है। सतयुग-त्रेता..... बीच में जरूर संगमयुग चाहिए। नहीं तो कलियुग को सतयुग कौन बनाये। नर्कवासियों को स्वर्गवासी बनाने बाप संगम पर आते हैं। यह तो हाइएस्ट अथॉरिटी गॉड फादरली गवर्नमेन्ट है। साथ में धर्मराज भी है। आत्मा कहती है मुझ निर्गुण हारे में कोई गुण नाही। कोई भी देवता के मन्दिर में जायेंगे तो उनके आगे ऐसे कहेंगे। कहना चाहिए बाप को। उनको छोड़ ब्रदर्स (देवताओं) को आकर लगे हैं। यह देवतायें ब्रदर्स ठहरे ना। ब्रदर्स से तो कुछ भी मिलना नहीं है। भाइयों की पूजा करते-करते नीचे गिरते आये हैं। अब तुम बच्चे जानते हो बाबा आया हुआ है, उनसे हमको वर्सा मिलता है। बाप को ही नहीं जानते, सर्वव्यापी कह देते हैं। कोई फिर कहते अखण्ड ज्योति तत्व है। कोई कहते वह नाम-रूप से न्यारा है। जब अखण्ड ज्योति स्वरूप है तो फिर नाम-रूप से न्यारा कैसे कहते हो। बाप को न जानने कारण ही पतित बन पड़े हैं। तमोप्रधान भी बनना ही है। फिर जब बाप आते हैं तब आकर सभी को सतोप्रधान बनाते हैं। आत्मायें निराकारी दुनिया में सब बाप के साथ रहती हैं फिर यहाँ सतो-रजो-तमो में आकर पार्ट बजाती हैं। आत्मा ही बाप को याद करती है। बाप आते भी हैं, कहते भी हैं ब्रह्मा तन का आधार लेता हूँ। यह है भाग्यशाली रथ। बिगर आत्मा रथ थोड़ेही होता है। अभी तुम बच्चों को समझाया है, यह है ज्ञान की वर्षा। नॉलेज है, इससे क्या होता है? पतित दुनिया से पावन दुनिया बनती है। गंगा-जमुना तो सतयुग में भी होते हैं। कहते हैं कृष्ण जमुना के कण्ठे पर खेलपाल करते हैं। ऐसी कोई बातें हैं नहीं। वह तो सतयुग का प्रिन्स है। बहुत अच्छी रीति उनको सम्भाला जाता है क्योंकि फूल है ना। फूल कितने अच्छे सुन्दर होते हैं। फूल से सब आकर खुशबू लेते हैं। कांटों की थोड़ेही खुशबू लेंगे। अभी तो यह है कांटों की दुनिया। कांटों के जंगल को बाप आकर गार्डन ऑफ फ्लावर बनाते हैं इसलिए उनका नाम बबुलनाथ भी रख दिया है। कांटों को बैठ फूल बनाते हैं इसलिए महिमा गाते हैं - कांटों को फूल बनाने वाले बाबा। अब तुम बच्चों का बाप के साथ कितना लव होना चाहिए। वो लौकिक बाप तो तुमको गटर में डालते हैं। यह बाप 21 जन्मों के लिए तुमको गटर से निकाल पावन बनाते हैं। वह तुमको पतित बनाते हैं तब तो लौकिक बाप होते भी पारलौकिक बाप को आत्मा याद करती है।

अभी तुम जानते हो आधाकल्प बाप को याद किया है। बाप आते भी जरूर हैं। शिवजयन्ती मनाते हैं ना। तुम जानते हो हम बेहद के बाप के बने हैं। अभी हमारा संबंध उनसे भी है तो लौकिक से भी है। पारलौकिक बाप को याद करने से तुम पावन बनेंगे। आत्मा जानती है वह हमारा लौकिक और यह पारलौकिक बाप है। भक्ति मार्ग में भी यह आत्मा जानती है। तब तो कहते हैं - हे भगवान, ओ गॉड फादर। अविनाशी फादर को याद करते हैं। वह बाप आकर हेविन स्थापन करते हैं। यह किसको पता नहीं हैं। शास्त्रों में तो युगों को भी बहुत लम्बी-चौड़ी आयु दे दी है। यह किसके ख्याल में नहीं आता कि बाप आते ही हैं पतितों को पावन बनाने। तो जरूर संगम पर आयेंगे। कल्प की आयु लाखों वर्ष लिख मनुष्यों को बिल्कुल घोर अन्धियारे में डाल दिया है। धक्के खाते रहते हैं, बाप को पाने के लिए। कहते हैं जो बहुत भक्ति करते हैं तो भगवान मिलता है। सबसे जास्ती भक्ति करने वाले को जरूर पहले मिलना चाहिए। बाप ने हिसाब भी बताया है, सबसे पहले भक्ति तुम करते हो। तो तुमको ही पहले-पहले भगवान द्वारा ज्ञान मिलना चाहिए जो फिर तुम ही नई दुनिया में राज्य करो। बेहद का बाप तुम बच्चों को ज्ञान दे रहे हैं, इसमें तकलीफ की कोई बात नहीं है। बाप कहते हैं तुमने आधाकल्प याद किया है। सुख में तो कोई याद करते ही नहीं। अन्त में जब दु:खी हो जाते हैं तब हम आकर सुखी बनाते हैं। अभी तुम बहुत बड़े आदमी बनते हो। देखो चीफ मिनिस्टर, प्राइम मिनिस्टर आदि के बंगले कितने फर्स्टक्लास होते हैं। वहाँ फिर गायें आदि सारा फर्नीचर ऐसा फर्स्टक्लास होगा। तुम तो कितने बड़े आदमी (देवता) बनते हो। दैवीगुणों वाले देवता स्वर्ग के मालिक बनते हो। वहाँ तुम्हारे लिए महल भी हीरे-जवाहरातों के होते हैं। वहाँ तुम्हारा फर्नीचर सोने के जड़ित का फर्स्टक्लास होगा। यहाँ तो झूले आदि सब बेगरी हैं। वहाँ तो फर्स्टक्लास हीरे-जवाहरातों की सब चीजें होंगी। यह है रूद्र ज्ञान यज्ञ। शिव को रूद्र भी कहते हैं। जब भक्ति पूरी होती है तो फिर भगवान रूद्र यज्ञ रचते हैं। सतयुग में यज्ञ अथवा भक्ति की बात ही नहीं। इस समय ही बाप यह अविनाशी रूद्र ज्ञान यज्ञ रचते हैं, जिसका फिर बाद में गायन चलता है। भक्ति सदैव तो नहीं चलती रहेगी। भक्ति और ज्ञान। भक्ति है रात, ज्ञान है दिन। बाप आकर दिन बनाते हैं तो बच्चों का बाप के साथ कितना लव होना चाहिए। बाबा हमको विश्व का मालिक बनाते हैं। मोस्ट बील्वेड बाबा है। उनसे ज्यादा प्यारी वस्तु कोई हो न सके। आधाकल्प से याद करते आये हो। बाबा आकर हमारे दु:ख हरो। अब बाप आये हैं। समझाते हैं तुमको अपने गृहस्थ व्यवहार में तो रहना ही है। यहाँ बाबा पास कहाँ तक बैठेंगे। बाप के साथ तो परमधाम में ही रह सकते। यहाँ इतने सब बच्चे तो नहीं रह सकते। टीचर सवाल कैसे पूछेंगे। लाउडस्पीकर पर रेसपान्ड कैसे दे सकेंगे इसलिए थोड़े-थोड़े स्टूडेन्ट्स को पढ़ाते हैं। कॉलेज तो बहुत होते हैं फिर सबके इम्तहान होते हैं। लिस्ट निकलती है। यहाँ तो एक ही बाप पढ़ाते हैं। यह भी समझाना चाहिए दु:ख में सिमरण सब उस पारलौकिक बाप का करते हैं। अब यह बाप आया हुआ है। महाभारी महाभारत लड़ाई भी सामने खड़ी है। वह समझते हैं महाभारत लड़ाई में कृष्ण आया। यह तो हो न सके। बिचारे मूँझे हुए हैं ना। फिर भी कृष्ण-कृष्ण याद करते रहते हैं। अब मोस्ट बील्वेड शिव भी है तो कृष्ण भी है। परन्तु वह है निराकार, वह है साकार। निराकार बाप सब आत्माओं का बाप है। हैं दोनों मोस्ट बील्वेड। कृष्ण भी विश्व का मालिक है ना। अभी तुम जज कर सकते हो - जास्ती प्यारा कौन? शिवबाबा ही तो ऐसा लायक बनाते हैं ना। कृष्ण क्या करते हैं? बाप ही तो उनको ऐसा बनाते हैं, तो गायन भी जास्ती उस बाप का होना चाहिए। शंकर का डांस दिखाते हैं। वास्तव में डांस आदि की तो बात नहीं। बाप ने समझाया है तुम सब पार्वतियां हो। यह शिव अमरनाथ तुमको कथा सुना रहे हैं। वह है वाइसलेस वर्ल्ड। विकार की बात नहीं। बाप विकारी दुनिया थोड़ेही रचेंगे। विकार में ही दु:ख है। मनुष्य हठयोग आदि बहुत सीखते हैं। गुफाओं में जाकर बैठते हैं, आग से भी चले जाते हैं। रिद्धि-सिद्धि भी बहुत है। जादूगरी से बहुत चीज़ों निकालते हैं। भगवान को भी जादूगर, रत्नागर, सौदागर कहते हैं तो जरूर चैतन्य है ना। कहते भी हैं मैं आता हूँ, जादूगर है ना। मनुष्य को देवता, बेगर से प्रिन्स बनाते हैं। ऐसा जादू कभी देखा। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) फूलों के बगीचे में चलना है इसलिए खुशबूदार फूल बनना है। किसी को भी दु:ख नहीं देना है। एक पारलौकिक बाप से सर्व संबंध जोड़ने हैं।

2) शिवबाबा प्यारे से प्यारा है उस एक को ही प्यार करना है। सुखदाता बाप को याद करना है।

वरदान:-

इस लोक के लगाव से मुक्त बन अव्यक्त वतन का सैर करने वाले उड़ता पंछी भव

बुद्धि रूपी विमान से अव्यक्त वतन व मूलवतन का सैर करने के लिए उड़ता पंछी बनो। बुद्धि द्वारा जब चाहो, जहाँ चाहो पहुंच जाओ। यह तब होगा जब बिल्कुल इस लोक के लगाव से परे रहेंगे। यह असार संसार है, इस असार संसार से जब कोई काम नहीं, कोई प्राप्ति नहीं तो बुद्धि द्वारा भी जाना बन्द करो। यह रौरव नर्क है इसमें जाने का संकल्प और स्वप्न भी न आये।

स्लोगन:-

अपने चेहरे और चलन से सत्यता की सभ्यता का अनुभव कराना ही श्रेष्ठता है।


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2 comments:

Satish varma said...

" फूलों के बग़ीचे में चलना है इसलिए खुशबूदार फूल बनना है।,,
"ओम शांति,,
गुड मॉर्निंग बाबा,,

Anupama Patel said...

Om Shanti

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