Tuesday, 27 October 2020

Brahma Kumaris Murli 28 October 2020 (HINDI) Madhuban BK Murli Today

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – 28 October 2020

 28/10/2020 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन

BK Murli is available to 'read' and to 'listen' Daily Murli in Hindi and English.'' Om Shanti. Shiv baba ke madhur Mahavakya. Brahma Kumaris BaapDada ki murli. Bk Murli Audio recorded by service team of sisters of bkdrluhar.com website


"मीठे बच्चे - तुम इस पाठशाला में आये हो स्वर्ग के लिए पासपोर्ट लेने, आत्म-अभिमानी बनो और अपना नाम रजिस्टर में नोट करा दो तो स्वर्ग में जायेंगे''

प्रश्नः-

कौन-सी स्मृति रहने के कारण बच्चे बाप का रिगार्ड नहीं रखते हैं?

उत्तर:-

कई बच्चों को यही स्मृति नहीं रहती कि जिसको सारी दुनिया पुकार रही है, याद कर रही है, वही ऊंच ते ऊंच बाप हम बच्चों की सेवा में उपस्थित हुआ है। यह निश्चय नम्बरवार है, जितना जिसको निश्चय है उतना रिगार्ड रखते हैं।

गीत:-

जो पिया के साथ है........

Brahma Kumaris Murli 28 October 2020 (HINDI)
Brahma Kumaris Murli 28 October 2020 (HINDI) 

ओम् शान्ति

सब बच्चे ज्ञान सागर के साथ तो हैं ही। इतने सब बच्चे एक जगह तो रह नहीं सकते। भल जो साथ हैं वह नज़दीक में डायरेक्ट ज्ञान सुनते हैं और जो दूर हैं उन्हों को देरी से मिलता है। परन्तु ऐसे नहीं कि साथ वाले जास्ती उन्नति को पाते हैं और दूर वाले कम उन्नति को पाते हैं। नहीं, प्रैक्टिकल देखा जाता है जो दूर हैं वह जास्ती पढ़ते हैं और उन्नति को पाते हैं। इतना जरूर है बेहद का बाप यहाँ हैं। ब्राह्मण बच्चों में भी नम्बरवार हैं। बच्चों को दैवीगुण भी धारण करने हैं। कोई-कोई बच्चों से बड़ी-बड़ी ग़फलत होती है। समझते भी हैं बेहद का बाप जिसको सारी सृष्टि याद करती है, वह हमारी सेवा में उपस्थित है और हमको ऊंच ते ऊंच बनाने का मार्ग बताते हैं। बहुत प्यार से समझाते हैं फिर भी इतना रिगार्ड देते नहीं। बांधेलियाँ कितनी मार खाती हैं, तड़फती हैं फिर भी याद में रह अच्छा उठा लेती हैं। पद भी ऊंच बन जाता है। बाबा सबके लिए नहीं कहते हैं। नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार तो हैं ही। बाप बच्चों को सावधान करते हैं, सब तो एक जैसे हो सकें। बांधेलियाँ आदि बाहर में रहकर भी बड़ी कमाई करती हैं। यह गीत तो भक्ति मार्ग वालों का बना हुआ है। परन्तु तुम्हारे लिए अर्थ करने जैसा भी है, वह क्या जानें, पिया कौन है, किसका पिया है? आत्मा खुद को ही नहीं जानती तो बाप को कैसे जाने। है तो आत्मा ना। मैं क्या हूँ, कहाँ से आई हूँ - यह भी पता नहीं है। सब हैं देह-अभिमानी। आत्म-अभिमानी कोई है नहीं। अगर आत्म-अभिमानी बनें तो आत्मा को अपने बाप का भी पता हो। देह-अभिमानी होने के कारण आत्मा को, परमपिता परमात्मा को जानते हैं। यहाँ तो तुम बच्चों को बाप बैठ सम्मुख समझाते हैं। यह बेहद का स्कूल है। एक ही एम ऑब्जेक्ट है - स्वर्ग की बादशाही प्राप्त करना। स्वर्ग में भी बहुत पद हैं। कोई राजा-रानी कोई प्रजा। बाप कहते हैं - मैं आया हूँ तुमको फिर से डबल सिरताज बनाने। सब तो डबल सिरताज बन सकें। जो अच्छी रीति पढ़ते हैं वह अपने अन्दर में समझते हैं हम यह बन सकते हैं। सरेन्डर भी हैं, निश्चय भी है। सब समझते हैं इनसे कोई ऐसा छी-छी काम नहीं होता है। कोई-कोई में बहुत अवगुण होते हैं। वह थोड़ेही समझेंगे कि हम कोई इतना ऊंच पद पायेंगे इसलिए पुरूषार्थ ही नहीं करते। बाप से पूछें कि मैं यह बन सकता हूँ, तो बाबा झट बतायेंगे। अपने को देखेंगे तो झट समझेंगे बरोबर मैं ऊंच पद नहीं पा सकता हूँ। लक्षण भी चाहिए ना। सतयुग-त्रेता में तो ऐसी बातें होती नहीं। वहाँ है प्रालब्ध। बाद में जो राजायें होते हैं, वह भी प्रजा को बहुत प्यार करते हैं। यह तो मात-पिता है। यह भी तुम बच्चे ही जानते हो। यह तो बेहद का बाप है, यह सारी दुनिया को रजिस्टर करने वाले हैं। तुम भी रजिस्टर करते हो ना। पासपोर्ट दे रहे हो। स्वर्ग का मालिक बनने के लिए यहाँ से तुमको पासपोर्ट मिलता है। बाबा ने कहा था सबका फोटो होना चाहिए, जो वैकुण्ठ के लायक हैं क्योंकि तुम मनुष्य से देवता बनते हो। बाजू में ताज तख्त वाला फोटो हो। हम यह बन रहे हैं। प्रदर्शनी आदि में भी यह सैम्पुल रखना चाहिए - यह है ही राजयोग। समझो बैरिस्टर बनते हैं तो वह एक तरफ आर्डनरी ड्रेस में हो, एक तरफ बैरिस्टरी ड्रेस। वैसे एक तरफ तुम साधारण, एक तरफ डबल सिरताज। तुम्हारा एक चित्र है ना - जिसमें पूछते हो क्या बनना चाहते हो? यह बैरिस्टर आदि बनना है या राजाओं का राजा बनना है। ऐसे चित्र होने चाहिए। बैरिस्टर जज आदि तो यहाँ के हैं। तुमको राजाओं का राजा नई दुनिया में बनने का है। एम ऑब्जेक्ट सामने है। हम यह बन रहे हैं। समझानी कितनी अच्छी है। चित्र भी बड़े अच्छे हों फुल साइज़ के। वह बैरिस्टरी पढ़ते हैं तो योग बैरिस्टर से है। बैरिस्टर ही बनते हैं। इनका योग परमपिता परमात्मा से है तो डबल सिरताज बनते हैं। अब बाप समझाते हैं बच्चों को एक्ट में आना चाहिए। लक्ष्मी-नारायण के चित्र पर समझाना बहुत सहज होगा। हम यह बन रहे हैं तो तुम्हारे लिए जरूर नई दुनिया चाहिए। नर्क के बाद है स्वर्ग।

अभी यह है पुरूषोत्तम संगमयुग। यह पढ़ाई कितना ऊंच बनाने वाली है, इसमें पैसे आदि की दरकार नहीं है। पढ़ाई का शौक होना चाहिए। एक आदमी बहुत गरीब था, पढ़ने के लिए पैसे नहीं थे। फिर पढ़ते-पढ़ते मेहनत करके इतना साहूकार हो गया जो क्वीन विक्टोरिया का मिनिस्टर बन गया। तुम भी अभी कितने गरीब हो। बाप कितना ऊंच पढ़ाते हैं। इसमें सिर्फ बुद्धि से बाप को याद करना है। बत्ती आदि जगाने की भी दरकार नहीं। कहाँ भी बैठे याद करो। परन्तु माया ऐसी है जो बाप की याद भुला देती है। याद में ही विघ्न पड़ते हैं। यही तो युद्ध है ना। आत्मा पवित्र बनती ही है बाप को याद करने से। पढ़ाई में माया कुछ नहीं करती। पढ़ाई से याद का नशा ऊंच है, इसलिए प्राचीन योग गाया हुआ है। योग और ज्ञान कहा जाता है। योग के लिए ज्ञान मिलता है - ऐसे-ऐसे याद करो। और फिर सृष्टि चक्र का भी ज्ञान है। रचयिता और रचना के आदि-मध्य-अन्त को और कोई नहीं जानते। भारत का प्राचीन योग सिखलाते हैं। प्राचीन तो कहा जाता है नई दुनिया को। उनको फिर लाखों वर्ष दे दिये हैं। कल्प की आयु भी अनेक प्रकार की बताते हैं। कोई क्या कहते, कोई क्या कहते। यहाँ तुमको एक ही बाप पढ़ा रहे हैं। तुम बाहर में भी जायेंगे, तुमको चित्र मिलेंगे। यह तो व्यापारी है ना। बाबा कहते कपड़े पर छप सकते हैं। अगर किसके पास बड़ी स्क्रीन प्रेस हो तो आधा-आधा कर दे। फिर जॉइंट ऐसा कर लेते हैं जो पता भी नहीं पड़ता है। बेहद का बाप, बड़ी सरकार कहते हैं, कोई छपाकर दिखाये तो मैं उनका नाम बाला करूँगा। यह चित्र कपड़े पर छपाए कोई विलायत ले जाए तो तुमको एक-एक चित्र का कोई 5-10 हज़ार भी दे देवे। पैसे तो वहाँ ढेर हैं। बन सकते हैं, इतनी बड़ी-बड़ी प्रेस हैं, शहरों की सीन सीनरी ऐसी-ऐसी छपती हैं - बात मत पूछो। यह भी छप सकते हैं। यह तो ऐसी फर्स्टक्लास चीज़ है - कहेंगे सच्चा ज्ञान तो इनमें ही है, और कोई के पास तो है ही नहीं। किसको पता ही नहीं - फिर समझाने वाला भी इंगलिश में होशियार चाहिए। इंगलिश तो सब जानते हैं। उन्हों को भी सन्देश तो देना है ना। वही विनाश अर्थ निमित्त बने हुए हैं ड्रामा अनुसार। बाबा ने बताया है उन्हों के पास बॉम्ब्स आदि ऐसे-ऐसे हैं जो दोनों अगर आपस में मिल जाएं तो सारे विश्व के मालिक बन सकते हैं। परन्तु यह ड्रामा ही ऐसा बना हुआ है जो तुम योगबल से विश्व की बादशाही लेते हो। हथियार आदि से विश्व के मालिक बन सकें। वह है साइन्स, तुम्हारी है साइलेन्स। सिर्फ बाप को और चक्र को याद करो, आपसमान बनाओ।

तुम बच्चे योगबल से विश्व की बादशाही ले रहे हो। वह आपस में लड़ेंगे भी जरूर। माखन बीच में तुमको मिलना है। कृष्ण के मुख में माखन का गोला दिखाते हैं। कहावत भी है दो आपस में लड़े, बीच में माखन तीसरा खा गया। है भी ऐसे। सारे विश्व की राजाई का माखन तुमको मिलता है। तो तुमको कितनी खुशी होनी चाहिए। वाह बाबा आपकी तो कमाल है। नॉलेज तो आपकी ही है। बड़ी अच्छी समझानी है। आदि सनातन देवी-देवता धर्म वालों ने विश्व की बादशाही कैसे प्राप्त की। यह किसको भी ख्याल में होगा नहीं। उस समय और कोई खण्ड होता नहीं। बाप कहते हैं मैं विश्व का मालिक नहीं बनता, तुमको बनाता हूँ। तुम पढ़ाई से विश्व के मालिक बनते हो। मैं परमात्मा तो हूँ ही अशरीरी। तुम सबको शरीर है। देहधारी हो। ब्रह्मा-विष्णु-शंकर को भी सूक्ष्म शरीर है। जैसे तुम आत्मा हो वैसे मैं भी परम आत्मा हूँ। मेरा जन्म दिव्य और अलौकिक है, और कोई भी ऐसे जन्म नहीं लेते हैं। यह मुकरर है। यह सब ड्रामा में नूध है। कोई अभी मर जाते हैं - यह भी ड्रामा में नूध हैं। ड्रामा की समझानी कितनी मिलती है। समझेंगे नम्बर-वार। कोई तो डल बुद्धि होते हैं। तीन ग्रेड्स होती हैं। पिछाड़ी की ग्रेड वाले को डल कहा जाता है। खुद भी समझते हैं यह फर्स्ट ग्रेड में है, यह सेकण्ड में है। प्रजा में भी ऐसे ही है। पढ़ाई तो एक ही है। बच्चे जानते हैं यह पढ़कर हम सो डबल सिरताज बनेंगे। हम डबल सिरताज थे फिर सिंगल ताज फिर नो ताज बनें। जैसा कर्म वैसा फल कहा जाता है। सतयुग में ऐसे नहीं कहेंगे। यहाँ अच्छे कर्म करेंगे तो एक जन्म के लिए अच्छा फल मिलेगा। कोई ऐसे कर्म करते हैं जो जन्म से ही रोगी होते हैं। यह भी कर्मभोग है ना। बच्चों को कर्म, अकर्म, विकर्म का भी समझाया है। यहाँ जैसा करते हैं तो उसका अच्छा वा बुरा फल पाते हैं। कोई साहूकार बनते हैं तो जरूर अच्छे कर्म किये होंगे। अभी तुम जन्म-जन्मान्तर की प्रालब्ध बनाते हो। गरीब साहूकार का फ़र्क तो वहाँ रहता है ना, अभी के पुरूषार्थ अनुसार। वह प्रालब्ध है अविनाशी 21 जन्मों के लिए। यहाँ मिलता है अल्पकाल का। कर्म तो चलता है ना। यह कर्म क्षेत्र है। सतयुग है स्वर्ग का कर्म क्षेत्र। वहाँ विकर्म होता ही नहीं। यह सब बातें बुद्धि में धारण करनी है। कोई विरले हैं जो सदैव प्वाइंट्स लिखते रहते हैं। चार्ट भी लिखते-लिखते फिर थक जाते हैं। तुम बच्चों को प्वाइंट्स लिखनी चाहिए। बहुत महीन-महीन प्वाइंट्स हैं। जो सब तुम कभी याद नहीं कर सकेंगे, खिसक जायेंगी। फिर पछतायेंगे कि यह प्वाइंट तो हम भूल गये। सबका यह हाल होता है। भूलते बहुत हैं फिर दूसरे दिन याद पड़ेगा। बच्चों को अपनी उन्नति के लिए ख्याल करना है। बाबा जानते हैं कोई विरले यथार्थ रीति लिखते होंगे। बाबा व्यापारी भी है ना। वह है विनाशी रत्नों के व्यापारी। यह है ज्ञान रत्नों के। योग में ही बहुत बच्चे फेल होते हैं। एक्यूरेट याद में कोई घण्टा डेढ़ भी मुश्किल रह सकते हैं। 8 घण्टा तो पुरूषार्थ करना है। तुम बच्चों को शरीर निर्वाह भी करना है। बाबा ने आशिक-माशूक का भी मिसाल दिया है। बैठे-बैठे याद किया और झट सामने जाते। यह भी एक साक्षात्कार है। वह उनको याद करते, वह उनको याद करते। यहाँ तो फिर एक है माशूक, तुम सब हो आशिक। वह सलोना माशूक तो सदैव गोरा है। एवर प्योर। बाप कहते हैं मैं मुसाफिर सदैव खूबसूरत हूँ। तुमको भी खूबसूरत बनाता हूँ। इन देवताओं की नेचुरल ब्युटी है। यहाँ तो कैसे-कैसे फैशन करते हैं। भिन्न-भिन्न ड्रेस पहनते हैं। वहाँ तो एकरस नेचुरल ब्युटी रहती है। ऐसी दुनिया में अब से तुम जाते हो। बाप कहते हैं मैं पुराने पतित देश, पतित शरीर में आता हूँ। यहाँ पावन शरीर है नहीं। बाप कहते हैं मैं इनके बहुत जन्मों के अन्त में प्रवेश कर प्रवृत्ति मार्ग की स्थापना करता हूँ। आगे चल तुम सर्विसएबुल बनते जायेंगे। पुरूषार्थ करेंगे फिर समझेंगे। आगे भी ऐसा पुरूषार्थ किया था, अब कर रहे हैं। पुरूषार्थ बिगर तो कुछ भी मिल सके। तुम जानते हो हम नर से नारायण बनने का पुरूषार्थ कर रहे हैं। नई दुनिया की राजधानी थी, अब नहीं है, फिर होगी। आइरन एज के बाद फिर गोल्डन एज जरूर होगी। राजधानी स्थापन होनी ही है। कल्प पहले मुआफिक। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) सरेन्डर के साथ-साथ निश्चयबुद्धि बनना है। कोई भी छी-छी काम हो। अन्दर कोई भी अवगुण रहे तब अच्छा पद मिल सकता है।

2) ज्ञान रत्नों का व्यापार करने के लिए बाबा जो अच्छी-अच्छी प्वाइंट्स सुनाते हैं, उन्हें नोट करना है। फिर उन्हें याद करके दूसरों को सुनाना है। सदा अपनी उन्नति का ख्याल करना है।

वरदान:-

वायरलेस सेट द्वारा विनाश काल में अन्तिम डायरेक्शन्स को कैच करने वाले वाइसलेस भव

विनाश के समय अन्तिम डायरेक्शन्स को कैच करने के लिए वाइसलेस बुद्धि चाहिए। जैसे वे लोग वायरलेस सेट द्वारा एक दूसरे तक आवाज पहुंचाते हैं। यहाँ है वाइसलेस की वायरलेस। इस वायरलेस द्वारा आपको आवाज आयेगा कि इस सेफ स्थान पर पहुंच जाओ। जो बच्चे बाप की याद में रहने वाले वाइसलेस हैं, जिन्हें अशरीरी बनने का अभ्यास है वे विनाश में विनाश नहीं होंगे लेकिन स्वेच्छा से शरीर छोड़ेंगे।

स्लोगन:-

योग को किनारे कर कर्म में बिजी हो जाना - यही अलबेलापन है।

4 comments:

RAJINDERA ARORA said...

Om Om Shanti Good morning 💐🏵️🌸🌼🌻🌹

GIRIJESH KUMAR DWIVEDI said...

OM SHANTI.
I AM A PEACEFUL SOUL, SON OF SUPREME SOUL SHIV BABA.

Satish varma said...

Om shanti,,

BK Murli Today (Brahma Kumaris Murli) said...

Om Shanti Good morning