Saturday, 6 July 2019

Brahma Kumaris Murli 07 July 2019 (HINDI) Madhuban BK Murli Today

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – 07 July 2019

07/07/2019 प्रात:मुरली ओम् शान्ति ''अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज: 26/12/84 मधुबन
BK Murli is available to 'read' and to 'listen' Daily Murli in Hindi and English.'' Om Shanti. Shiv baba ke madhur Mahavakya. Brahma Kumaris BaapDada ki murli. Bk Murli Audio recorded by service team of sisters of bkdrluhar.com website


सत्यता की शक्ति
सर्व शक्तिमान बाप आज विशेष दो सत्ताओं को देख रहे हैं। एक राज सत्ता दूसरी है ईश्वरीय सत्ता। दोनों सत्ताओं का अब संगम पर विशेष पार्ट चल रहा है। राज्य सत्ता हलचल में है। ईश्वरीय सत्ता सदा अचल अविनाशी है। ईश्वरीय सत्ता को सत्यता की शक्ति कहा जाता है क्योंकि देने वाला सत् बाप, सत् शिक्षक, सतगुरू है इसलिए सत्यता की शक्ति सदा श्रेष्ठ है। सत्यता की शक्ति द्वारा सतयुग, सचखण्ड स्थापन कर रहे हो। सत अर्थात् अविनाशी भी है। तो सत्यता की शक्ति द्वारा अविनाशी वर्सा, अविनाशी पद प्राप्त करने वाली पढ़ाई, अविनाशी वरदान प्राप्त किये हैं। इस प्राप्ति से कोई भी मिटा नहीं सकता। सत्यता की शक्ति से सारी विश्व आप सत्यता की, शक्ति वालों का भक्तिमार्ग के आदि से अन्त तक अविनाशी गायन और पूजन करती आती है अर्थात् गायन पूजन भी अविनाशी सत हो जाता है। सत अर्थात् सत्य। तो सबसे पहले क्या जाना? अपने आपको सत आत्मा जाना। सत बाप के सत्य परिचय को जाना। 
Brahma Kumaris Murli 07 July 2019 (HINDI)
Brahma Kumaris Murli 07 July 2019 (HINDI) 
इस सत्य पहचान से सत्य ज्ञान से सत्यता की शक्ति स्वत: ही सत्य हो जाती। सत्यता की शक्ति द्वारा असत्य रूपी अंधकार, अज्ञान रूपी अंधकार स्वत: ही समाप्त हो जाता है। अज्ञान सदा असत्य होता है। ज्ञान सत है, सत्य है इसलिए भक्तों ने बाप की महिमा में भी कहा है सत्यम् शिवम् सुन्दरमˮ। सत्यता की शक्ति सहज ही प्रकृति जीत, मायाजीत बना देती है। अभी अपने आप से पूछो सत् बाप के बच्चे हैं तो सत्यता की शक्ति कहाँ तक धारण की है?

सत्यता के शक्ति की निशानी है वह सदा निर्भय होगा। जैसे मुरली में सुना है - सच तो बिठो नच
ˮ अर्थात् सत्यता की शक्ति वाला सदा बेफिकर निश्चिन्त होने के कारण, निर्भय होने के कारण खुशी में नाचता रहेगा। जहाँ भय है, चिंता है वहाँ खुशी में नाचना नहीं। अपनी कमजोरियों की भी चिंता होती है। अपने संस्कार वा संकल्प कमजोर हैं तो सत्य मार्ग होने के कारण मन में अपनी कमजोरी का चिंतन चलता जरूर है। कमजोरी मन की स्थिति को हलचल में जरूर लाती है। चाहे कितना भी अपने को छिपावे वा आर्टीफिशल अल्पकाल के समय प्रमाण, परिस्थिति प्रमाण बाहर से मुस्कराहट भी दिखावे लेकिन सत्यता की शक्ति स्वयं को महसूसता अवश्य कराती है। बाप से और अपने आप से छिप नहीं सकता। दूसरों से छिप सकता है। चाहे अलबेलेपन के कारण अपने आप को भी कभी-कभी महसूस होते हुए भी चला लेवे फिर भी सत्यता की शक्ति मन में उलझन के रूप में, उदासी के रूप में, व्यर्थ संकल्प के रूप में आती जरूर है क्योंकि सत्यता के आगे असत्य टिक नहीं सकता। जैसे भक्ति मार्ग में चित्र दिखाया है - सागर के बीच साँप के ऊपर नाच रहे हैं। है साँप लेकिन सत्यता की शक्ति से साँप भी नाचने की स्टेज बन जाते हैं। कैसी भी भयानक परिस्थिति हो, माया के विकराल रूप हों, सम्बन्ध-सम्पर्क वाले परेशान करने वाले हों, वायुमण्डल कितना भी जहरीला हो लेकिन सत्यता की शक्ति वाला इन सबको खुशी में नाचने की स्टेज बना देता है। तो यह चित्र किसका है? आप सभी का है ना। सभी कृष्ण बनने वाले हैं। इसी में हाथ उठाते हैं ना। राम के चरित्रों में ऐसी बातें नहीं हैं। उसका अभी-अभी वियोग, अभी-अभी खुशी है। तो कृष्ण बनने वाली आत्मायें ऐसी स्थिति रूपी स्टेज पर सदा नाचती रहती हैं। कोई प्रकृति वा माया वा व्यक्ति, वैभव उसे हिला नहीं सकता। माया को ही अपनी स्टेज वा शैया बना देगा। यह भी चित्र देखा है ना। साँप को शैया बना दिया अर्थात् विजयी बन गये। तो सत्यता की शक्ति की निशानी सच तो नच, यह चित्र है। सत्यता की शक्ति वाले कभी भी डूब नहीं सकते। सत्य की नईया डगमग खेल कर सकती है लेकिन डूब नहीं सकती। डगमगाना भी खेल अनुभव करेंगे। आजकल खेल भी जान बूझ कर ऊपर नीचे हिलने के बनाते हैं ना। है गिरना लेकिन खेल होने के कारण विजयी अनुभव करते कितनी भी हलचल होगी लेकिन खेल करने वाला यह समझेगा कि मैंने जीत प्राप्त कर ली। ऐसे सत्यता की शक्ति अर्थात् विजयी के वरदानी अपने को समझते हो ? अपना विजयी स्वरूप सदा अनुभव करते हो? अगर अब तक भी कोई हलचल है, भय है तो सत्य के साथ असत्य अभी रहा हुआ है इसलिए हलचल में ला रहा है। तो चेक करो - संकल्प, दृष्टि, वृत्ति, बोल और सम्बन्ध सम्पर्क में सत्यता की शक्ति अचल हैं? अच्छा - आज मिलने वाले बहुत हैं इसलिए इस सत्यता की शक्ति पर, ब्राहमण जीवन में कैसे विशेषता सम्पन्न चल सकते हैं इसका विस्तार फिर सुनायेंगे। समझा?

डबल विदेशी बच्चों ने क्रिसमस मनाई कि आज भी क्रिसमस है? ब्राहमण बच्चों के लिए संगमयुग ही मनाने का युग है। तो रोज़ नाचो, गाओ, खुशी मनाओ। कल्प के हिसाब से तो संगमयुग थोड़े दिनों के समान है ना इसलिए संगमयुग का हर दिन बड़ा है। अच्छा!

सभी सत्यता के शक्ति स्वरूप, सत बाप द्वारा सत वरदान वा वर्सा पाने वाले, सदा सत्यता की शक्ति द्वारा विजयी आत्मायें, सदा प्रकृति जीत, मायाजीत, खुशी में नाचने वाले, ऐसे सत बच्चों को सत बाप, शिक्षक और सतगुरू का यादप्यार और नमस्ते।

दादी चन्द्रमणी जी बापदादा से छुट्टी ले पंजाब जा रही हैं:-

सभी पंजाब निवासी सो मधुवन निवासी बच्चों को यादप्यार स्वीकार हो। सभी बच्चे सदा ही बेफिकर बादशाह बन रहे हो। क्यों? योगयुक्त बच्चे सदा छत्रछाया के अन्दर रहे हुए हैं। योगी बच्चे पंजाब में नहीं रहते लेकिन बापदादा की छत्रछाया में रहते हैं। चाहे पंजाब में हो चाहे कहाँ भी हो लेकिन छत्रछाया के बीच रहने वाले बच्चे सदा सेफ रहते हैं। अगर हलचल में आये तो कुछ न कुछ चोट लग जाती है। लेकिन अचल रहे तो चोट के स्थान पर होते हुए भी बाल बांका नहीं हो सकता इसलिए बापदादा का हाथ है, साथ है, तो बेफिकर बादशाह होकर रहो और खूब ऐसे अशान्त वातावरण में शान्ति की किरणें फैलाओ। नाउम्मीद वालों को ईश्वरीय सहारे की उम्मीद दिलाओ। हलचल वालों को अविनाशी सहारे की स्मृति दिलाए अचल बनाओ। यही सेवा पंजाब वालों को विशेष करनी है। पहले भी कहा था कि पंजाब वालों को नाम बाला करने का चांस भी अच्छा है। चारों ओर कोई सहारा नजर नहीं आ रहा है। ऐसे समय पर अनुभव करें कि दिल को आराम देने वाले, दिल को शान्ति का सहारा देने वाले यही श्रेष्ठ आत्मायें हैं। अशान्ति के समय शान्ति का महत्व होता है तो ऐसे टाइम पर यह अनुभव कराना, यही प्रत्यक्षता का एक निमित्त आधार बन जाता है। तो पंजाब वालों को डरना नहीं है लेकिन ऐसे समय पर वह अनुभव करें कि और सभी डराने वाले हैं लेकिन यह सहारा देने वाले हैं, ऐसा कोई मीटिंग करके प्लैन बनाओ जो अशान्त आत्मायें हैं उन्हों के संगठन में जाकर शान्ति का अनुभव कराओ। एक दो को भी शान्ति की अनुभूति कराई तो एक दो से लहर फैलती जायेगी और आवाज बुलन्द हो जायेगा। मीटिंग कर रहे हैं बहुत अच्छा, हिम्मत वाले हो, हुल्लास वाले हो और सदा ही हर कार्य में सहयोगी, स्नेही साथ रहे हो और सदा रहेंगे। पंजाब का नम्बर पीछे नहीं है, आगे है। पंजाब शेर कहा जाता है, शेर पीछे नहीं रहते, आगे रहते हैं। जो भी प्रोग्राम मिले उसमें हाँ जी, हाँ जी करना तो असम्भव भी सम्भव हो जायेगा। अच्छा सभी बच्चों से मिलन के बाद 5.30 बजे प्रात: बापदादा ने सतगुरूवार की यादप्यार दी

चारों ओर के सच्चे-सच्चे सत बाप, सत शिक्षक, सतगुरू के अति समीप, स्नेही सदा साथी बच्चों को सतगुरूवार के दिन बहुत-बहुत यादप्यार स्वीकार हो। आज सतगुरूवार के दिन बापदादा सभी को सदा सफलता स्वरूप रहो, सदा हिम्मत हुल्लास में रहो, सदा बाप की छत्रछाया के अन्दर सेफ रहो, सदा एक बल एक भरोसे में स्थित रह साक्षी हो सब दृश्य देखते हुए हर्षित रहो, ऐसे विशेष स्नेह भरे वरदान दे रहे हैं। इन्हीं वरदानों को सदा स्मृति में रखते हुए समर्थ रहो, सदा याद रहे और सदा याद में रहो। अच्छा - सभी को गुडमानिंग और सदा हर दिन की बधाई। अच्छा!

विशेष चुने हुए अव्यक्त महावाक्य - याद को ज्वाला स्वरूप बनाओ

बाप समान पाप कटेश्वर वा पाप हरनी तब बन सकते हो, जब आपकी याद ज्वाला स्वरूप हो। ऐसी याद ही आपके दिव्य दर्शनीय मूर्त को प्रत्यक्ष करेगी। इसके लिए कोई भी समय साधारण याद न हो। सदा ज्वाला स्वरूप, शक्ति स्वरूप याद में रहो। स्नेह के साथ शक्ति रूप कम्बाइन्ड हो।

वर्तमान समय संगठित रूप के ज्वाला स्वरूप की आवश्यकता है। ज्वाला स्वरूप की याद ही शक्तिशाली वायुमण्डल बनायेगी और निर्बल आत्मायें शक्ति सम्पन्न बनेंगी। सभी विघ्न सहज समाप्त हो जायेंगे और पुरानी दुनिया के विनाश की ज्वाला भड़केगी।

जैसे सूर्य विश्व को रोशनी की और अनेक विनाशी प्राप्तियों की अनुभूति कराता है। ऐसे आप बच्चे अपने महान तपस्वी रूप द्वारा प्राप्ति के किरणों की अनुभूति कराओ। इसके लिए पहले जमा का खाता बढ़ाओ। जैसे सूर्य की किरणें चारों ओर फैलती हैं, ऐसे आप मास्टर सर्वशक्तिवान् की स्टेज पर रहो तो शक्तियों व विशेषताओं रूपी किरणें चारों ओर फैलती अनुभव करेंगे।

ज्वाला-रूप बनने का मुख्य और सहज पुरुषार्थ - सदा यही धुन रहे कि अब वापिस घर जाना है और सबको साथ ले जाना है। इस स्मृति से स्वत: ही सर्व-सम्बन्ध, सर्व प्रकृति की आकर्षण से उपराम अर्थात् साक्षी बन जायेंगे। साक्षी बनने से सहज ही बाप के साथी वा बाप-समान बन जायेंगे।

ज्वाला स्वरूप याद अर्थात् लाइट हाउस और माइट हाउस स्थिति को समझते हुए इसी पुरुषार्थ में रहो। विशेष ज्ञान-स्वरूप के अनुभवी बन शक्तिशाली बनो। जिससे आप श्रेष्ठ आत्माओं की शुभ वृत्ति व कल्याण की वृत्ति और शक्तिशाली वातावरण द्वारा अनेक तड़पती हुई, भटकती हुई, पुकार करने वाली आत्माओं को आनन्द, शान्ति और शक्ति की अनुभूति हो।

जैसे अग्नि में कोई भी चीज़ डालने से उसका नाम, रूप, गुण सब बदल जाता है, ऐसे जब बाप के याद की लगन की अग्नि में पड़ते हो तो परिवर्तन हो जाते हो! मनुष्य से ब्राह्मण बन जाते, फिर ब्राह्मण से फरिश्ता सो देवता बन जाते। जैसे कच्ची मिट्टी को साँचे में ढालकर आग में डालते हैं तो ईट बन जाती, ऐसे यह भी परिवर्तन हो जाता। इसलिए इस याद को ही ज्वाला रूप कहा जाता है।

सेवाधारी हो, स्नेही हो, एक बल एक भरोसे वाले हो, यह तो सब ठीक है, लेकिन मास्टर सर्वशक्तिवान की स्टेज अर्थात् लाइट माइट हाउस की स्टेज, स्टेज पर आ जाए, याद ज्वाला रूप हो जाए तो सब आपके आगे परवाने के समान चक्र लगाने लग जाएं।

ज्वाला स्वरूप याद के लिए मन और बुद्धि दोनों को एक तो पावरफुल ब्रेक चाहिए और मोड़ने की भी शक्ति चाहिए। इससे बुद्धि की शक्ति वा कोई भी एनर्जी वेस्ट ना होकर जमा होती जायेगी। जितनी जमा होगी उतना ही परखने की, निर्णय करने की शक्ति बढ़ेगी। इसके लिए अब संकल्पों का बिस्तर बन्द करते चलो अर्थात् समेटने की शक्ति धारण करो।

कोई भी कार्य करते वा बात करते बीच-बीच में संकल्पों की ट्रैफिक को स्टॉप करो। एक मिनट के लिए भी मन के संकल्पों को, चाहे शरीर द्वारा चलते हुए कर्म को बीच में रोक कर भी यह प्रैक्टिस करो तब बिन्दू रूप की पावरफुल स्टेज पर स्थित हो सकेंगे। जैसे अव्यक्त स्थिति में रह कार्य करना सरल होता जा रहा है वैसे ही यह बिन्दुरूप की स्थिति भी सहज हो जायेगी।

जैसे कोई भी कीटाणु को मारने के लिए डॉक्टर लोग बिजली की रेज़ेस देते हैं। ऐसे याद की शक्तिशाली किरणें एक सेकेण्ड में अनेक विकर्मों रूपी कीटाणु भस्म कर देती हैं। विकर्म भस्म हो गये तो फिर अपने को हल्का और शक्तिशाली अनुभव करेंगे।

निरन्तर सहजयोगी तो हो सिर्फ इस याद की स्टेज को बीच-बीच में पावरफुल बनाने के लिए अटेन्शन का फोर्स भरते रहो। पवित्रता की धारणा जब सम्पूर्ण रूप में होगी तब आपके श्रेष्ठ संकल्प की शक्ति लगन की अग्नि प्रज्जवलित करेगी, उस अग्नि में सब किचड़ा भस्म हो जायेगा। फिर जो सोचेंगे वही होगा, विंहग मार्ग की सेवा स्वत: हो जायेगी।

जैसे देवियों के यादगार में दिखाते हैं कि ज्वाला से असुरों को भस्म कर दिया। असुर नहीं लेकिन आसुरी शक्तियों को खत्म कर दिया। यह अभी का यादगार है। अभी ज्वालामुखी बन आसुरी संस्कार, आसुरी स्वभाव सबकुछ भस्म करो। प्रकृति और आत्माओं के अन्दर जो तमोगुण है उसे भस्म करने वाले बनो। यह बहुत बड़ा काम है, स्पीड से करेंगे तब पूरा होगा।

कोई भी हिसाब-चाहे इस जन्म का, चाहे पिछले जन्म का, लग्न की अग्नि-स्वरूप स्थिति के बिना भस्म नहीं होता। सदा अग्नि-स्वरूप स्थिति अर्थात् ज्वालारूप की शक्तिशाली याद, बीजरूप, लाइट हाउस, माइट हाउस स्थिति में पुराने हिसाब-किताब भस्म हो जायेंगे और अपने आपको डबल लाइट अनुभव करेंगे। शक्तिशाली ज्वाला स्वरूप की याद तब रहेगी जब याद का लिंक सदा जुटा रहेगा। अगर बार-बार लिंक टूटता है, तो उसे जोड़ने में समय भी लगता, मेहनत भी लगती और शक्तिशाली के बजाए कमजोर हो जाते हो।

याद को शक्तिशाली बनाने के लिए विस्तार में जाते सार की स्थिति का अभ्यास कम न हो, विस्तार में सार भूल न जाये। खाओ-पियो, सेवा करो लेकिन न्यारेपन को नहीं भूलो। साधना अर्थात् शक्तिशाली याद। निरन्तर बाप के साथ दिल का सम्बन्ध। साधना इसको नहीं कहते कि सिर्फ योग में बैठ गये लेकिन जैसे शरीर से बैठते हो वैसे दिल, मन, बुद्धि एक बाप की तरफ बाप के साथ-साथ बैठ जाए। ऐसी एकाग्रता ही ज्वाला को प्रज्जवलित करेगी। अच्छा - ओम् शान्ति।
वरदान:-
अपने बोल की वैल्यु को समझ उसकी एकॉनामी करने वाले महान आत्मा भव
जैसे महान आत्माओं को कहते हैं - सत वचन महाराज। तो आपके बोल सदा सत वचन अर्थात् कोई न कोई प्राप्ति कराने वाले वचन हो। ब्राह्मणों के मुख से कभी किसी को श्रापित करने वाले बोल नहीं निकलने चाहिए इसलिए युक्तियुक्त बोलो और काम का बोलो। बोल की वैल्यु को समझो। शुभ शब्द सुख देने वाले शब्द बोलो, हंसीमजाक के बोल नहीं बोलो, बोल की एकॉनामी करो तो महान आत्मा बन जायेंगे।
स्लोगन:-
यदि श्रीमत का हाथ सदा साथ है तो सारा ही युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे।

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