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Saturday, 2 March 2019

Brahma Kumaris Murli 03 March 2019 (HINDI) Madhuban BK Murli Today

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – 03 March 2019


03/03/2019 प्रात:मुरली ओम् शान्ति ''अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज: 28/02/84 मधुबन
BK Murli is available to 'read' and to 'listen' Daily Murli in Hindi and English.'' Om Shanti. Shiv baba ke madhur Mahavakya. Brahma Kumaris BaapDada ki murli. Bk Murli Audio recorded by service team of sisters of bkdrluhar.com website


'बिन्दू और बूंद का रहस्य"
आज भोलानाथ बाप अपने भोले बच्चों से, बच्चों का सो बाप का अवतरण दिवस अर्थात् अलौकिक रुहानी जयन्ती मनाने आये हैं। भोलानाथ बाप को सबसे प्रिय भोले बच्चे हैं। भोले अर्थात् जो सदा सरल स्वभाव, शुभ भाव और स्वच्छता सम्पन्न मन और कर्म दोनों में सच्चाई और सफाई, ऐसे भोले बच्चे भोलानाथ बाप को भी अपने ऊपर आकर्षित करते हैं। भोलानाथ बाप ऐसे सरल स्वभाव भोले बच्चों के गुणों की माला सदा ही सिमरण करते रहते हैं। आप सभी ने अनके जन्मों में बाप के नाम की माला सिमरण की और बाप अभी संगमयुग पर बच्चों को रिटर्न दे रहे हैं। बच्चों की गुण माला सिमरण करते हैं। कितने भोले बच्चे भोलानाथ को प्यारे हैं। जितना ज्ञान स्वरुप, नॉलेजफुल, पावरफुल उतना ही भोलापन। भगवान को भोलापन प्यारा है। ऐसे अपने श्रेष्ठ भाग्य को जानते हो ना, जो भगवान को मोह लिया। अपना बना दिया।

आज भक्तों और बच्चों दोनों का विशेष मनाने का दिन है। भक्त तैयारियां कर रहे हैं, आह्वान कर रहे हैं और आप सम्मुख बैठे हो। भक्तों की लीला भी बाप देख-देख मुस्कराते हैं और बच्चों की मिलन लीला देख-देख हर्षाते हैं। एक तरफ वियोगी भक्त आत्मायें, दूसरे तरफ सहज योगी बच्चे। दोनों ही अपनी-अपनी लगन से प्रिय हैं। भक्त भी कोई कम नहीं हैं। 
Brahma Kumaris Murli 03 March 2019 (HINDI)
Brahma Kumaris Murli 03 March 2019 (HINDI)
कल के दिन आकारी इष्ट रुप में चक्र लगाकर देखना। बाप के साथ सालिग्राम बच्चों की भी विशेष रुप से पूजा होगी। अपना पूजन बाप के साथ भक्तों का देखना। अभी अन्त तक भी नौधा भक्त कोई-कोई हैं जो सच्चे स्नेह से भक्ति कर भक्ति की भावना का अल्प समय का फल अनुभव करते हैं। कल का दिन भक्तों के भक्ति की विशेष लगन का दिन है। समझा!

आप सभी बाप की जयन्ती मनायेंगे या अपनी? सारे कल्प में बाप और बच्चों का एक ही बर्थ-डे हो, यह हो सकता है? भल दिन वही हो, वर्ष वह नहीं हो सकता। बाप और बच्चे का अन्तर तो होगा ना। लेकिन अलौकिक जयन्ती बाप और बच्चों की साथ-साथ है। आप कहेंगे हम बाप का बर्थ डे मनाते हैं और बाप कहते, बच्चों का बर्थ डे मनाते हैं। तो वन्डरफुल बर्थ-डे हो गया ना। अपना भी मनाते, बाप का भी मनाते। इससे ही सोचो कि भोलानाथ बाप का बच्चों के साथ कितना स्नेह है, जो जन्म दिन भी एक ही है। तो इतना मोह लिया ना - भोलानाथ को। भक्त लोग अपने भक्ति की मस्ती में मस्त हो जाते हैं और आप 'पा लिया' इसी खुशी में साथ-साथ मनाते, गाते, नाचते हो। यादगार जो बनाया है उसमें भी बहुत रहस्य समाया हुआ है।

पूजा में, चित्रों में दो विशेषतायें विशेष हैं। एक तो है बिन्दू की विशेषता और दूसरी है - बूँद-बूँद की विशेषता। पूजा की विधि में बूँद-बूँद का महत्व है। इस समय आप बच्चे बिन्दू के रहस्य में स्थित होते हो। विशेष सारे ज्ञान का सार एक बिन्दू शब्द में समाया हुआ है। बाप भी बिन्दू, आप आत्मायें भी बिन्दू और ड्रामा का ज्ञान धारण करने के लिए जो हुआ - फिनिश अर्थात् फुलस्टाप, बिन्दू लगा दिया। परम आत्मा, आत्मा और यह प्रकृति का खेल अर्थात् ड्रामा तीनों का ज्ञान प्रैक्टिकल लाइफ में बिन्दू ही अनुभव करते हो ना। इसलिए भक्ति में भी प्रतिमा के बीच बिन्दू का महत्व है। दूसरा है - बूँद का महत्व - आप सभी याद में बैठते हो या किसी को भी याद में बिठाते हो तो किस विधि से कराते हो? संकल्पों की बूँदों द्वारा - मैं आत्मा हूँ, यह बूँद डाली। बाप का बच्चा हूँ - यह दूसरी बूँद। ऐसे शुद्ध संकल्प की बूँद द्वारा मिलन की सिद्धि का अनुभव करते हो ना। तो एक है शुद्ध संकल्पों की स्मृति की बूँद। दूसरा जब रुह-रिहान करते हो, बाप की एक-एक महिमा और प्राप्ति के शुद्ध संकल्प की बूँद डालते हो ना। आप ऐसे हो, आपने हमको यह बनाया। यही मीठी-मीठी शीतल बूँदे बाप के ऊपर डालते अर्थात् बाप से रुह-रिहान करते हो। एक-एक बात करके सोचते हो ना, इकट्ठा ही नहीं। तीसरी बात - सभी बच्चे अपने तन-मन-धन से सहयोग की बूँद डालते। इसलिए आप लोग विशेष कहते हो फुरीफुरी तलाब। इतना बड़ा विश्व परिवर्तन का कार्य, सर्व शक्तिमान का बेहद का विशाल कार्य उसमें आप हरेक जो भी सहयोग देते हो, बूँद समान ही तो सहयोग है। लेकिन सभी की बूँद-बूँद के सहयोग से, सहयोग का विशाल सागर बन जाता है। इसलिए पूजा की विधि में भी बूँद का महत्व दिखाया है।

विशेष व्रत की विधि दिखाते हैं। व्रत लेते हो ना। आप सभी बाप के सहयोगी बनने में व्यर्थ संकल्प के भोजन का व्रत लेते हो कि कभी भी बुद्धि में अशुद्ध व्यर्थ संकल्प स्वीकार नहीं करेंगे। यह व्रत अर्थात् दृढ़ संकल्प लेते हो और भक्त लोग अशुद्ध भोजन का व्रत रखते हैं। और साथ-साथ आप सदा के लिए जागती ज्योति बन जाते हो और वह उसके याद स्वरुप में जागरण करते हैं। आप बच्चों के अविनाशी रुहानी अन्तर्मुखी विधियों को भक्तों ने स्थूल बाहरमुखी विधियां बना दी हैं। लेकिन कापी आप लोगों को ही की है। जो कुछ टच हुआ, रजोप्रधान बुद्धि होने कारण ऐसे ही विधि बना दी। वैसे रजोगुणी नम्बरवन भक्त और भक्ति के हिसाब से सतोगुणी भक्त तो ब्रह्मा और आप सभी विशेष आत्मायें निमित्त बनते हो। लेकिन पहले मन्सा स्नेह और मन्सा शक्ति होने के कारण मानसिक भाव की भक्ति शुरु होती है। यह स्थूल विधियां पीछे-पीछे धीरे-धीरे ज्यादा होती हैं। फिर भी रचयिता बाप अपने भक्त आत्मायें रचना को और उन्हों की विधियों को देख यही कहेंगे कि इन भक्तों के टचिंग की बुद्धि की भी कमाल है। फिर भी इन विधियों द्वारा बुद्धि को बिजी रखने से, विकारों में जाने से कुछ न कुछ किनारा तो किया ना। समझा - आपके यथार्थ सिद्धि की विधि भक्ति में क्या-क्या चलती आ रही है। यह है यादगार का महत्व।

डबल विदेशी बच्चे तो भक्ति देखने से किनारे में रहते हैं। लेकिन आप सबके भक्त हैं। तो भक्तों की लीला आप बच्चे अनुभव करते हो कि हम पूज्य आत्माओं का अभी भी भक्त आत्मायें कैसे पूजन भी कर रही हैं और आह्वान भी कर रही हैं। ऐसे महसूस करते हो? कभी अनुभव होता है - भक्तों की पुकार का। रहम आता है भक्तों पर? भक्तों का ज्ञान भी अच्छी तरह से है ना! भक्त पुकारें और आप समझो नहीं तो भक्तों का क्या होगा। इसलिए भक्त क्या हैं, पुजारी क्या हैं, पूज्य क्या हैं, इस राज़ को भी अच्छी तरह से जानते हो। पूज्य और पुजारी के राज़ को जानते हो ना! अच्छा। कभी भक्तों की पुकार का अनुभव होता है? पाण्डवों को भी होता है वा सिर्फ शक्तियों को होता है। सालीग्राम तो ढेर होते हैं। लाखों की अन्दाज में। लेकिन देवतायें लाखों की अन्दाज में नहीं होते। देवियां वा देवतायें हजारों की अन्दाज में होंगे, लाखों की अन्दाज में नहीं होंगे। अच्छा - इसका राज़ भी फिर कभी सुनायेंगे। डबल विदेशियों में भी जो आदि में आये हैं, जो शुरु में एग्जैम्पल बने हैं चाहे शक्तियां अथवा पाण्डव, उन्हों की भी विशेषता है ना। बाप तो सबसे पहले बड़ा विदेशी है। सबसे ज्यादा समय विदेश में कौन रहता है? बाप रहता है ना।

अभी दिन प्रतिदिन जितना आगे समय आयेगा उतना भक्तों के आह्वान का आवाज उन्हों की भावनायें सब आपके पास स्पष्ट रुप में अनुभव होंगी। कौन-सी इष्ट देवी वा देवता है, वो भी मालूम पड़ेगा। थोड़े पक्के हो जाओ फिर यह सब दिव्य बुद्धि की टचिंग द्वारा ऐसे अनुभव होगा जैसे दिव्य दृष्टि से स्पष्ट दिखाई देता है। अभी तो सज़ रहे हो इसलिए प्रत्यक्षता का पर्दा नहीं खुल रहा है। जब सज जायेंगे तब पर्दा खुलेगा और स्वयं को भी देखेंगे। फिर सबके मुख से निकलेगा कि यह फलानी देवी भी आ गई। फलाना देवता भी आ गया। अच्छा!

सदा भोलेनाथ बाप के सरलचित, सहज स्वभाव वाले सहज योगी, भोले बच्चे, सदा बिन्दी और बूँद के रहस्य को जीवन में धारण करने वाले, धारणा स्वरुप आत्मायें, सदा मन, वाणी कर्म में दृढ़ संकल्प का व्रत लेने वाली ज्ञानी तू आत्मायें, सदा अपने पूज्य स्वरुप में स्थित रहने वाली पूज्य आत्माओं को भोलानाथ, वरदाता, विधाता बाप का याद-प्यार और नमस्ते।

झण्डा लहराने के पश्चात बापदादा के मधुर महावाक्

बाप कहते हैं बच्चों का झण्डा सदा महान है। बच्चे नहीं होते तो बाप भी क्या करते। आप कहते हैं बाप का झण्डा सदा महान... (गीत बज रहा था) और बाप कहते हैं बच्चों का झण्डा सदा महान। सदा सभी बच्चों के मस्तक पर विजय का झण्डा लहरा रहा है। सबके नयनों में, सबके मस्तक में विजय का झण्डा लहराया हुआ है। बापदादा देख रहे हैं - यह एक झण्डा नहीं लहराया लेकिन सबके मस्तक के साथ-साथ विजय का झण्डा अविनाशी लहराया हुआ है।

बाप और बच्चों के वन्डरफुल बर्थ डे की मुबारक

चारों ओर के अति स्नेही, सेवा के साथी, सदा कदम में कदम रखने वाले बच्चों को इस अलौकिक ब्राह्मण जीवन की बर्थ डे की मुबारक हो। सदा सभी बच्चों को बापदादा यादप्यार और मुबारक के रिटर्न में स्नेह भरी बांहों की माला पहनाते हुए मुबारक दे रहे हैं। सभी बच्चों को यह अलौकिक बर्थ-डे विश्व की हर आत्मा यादगार रुप में मनाती ही आती है क्योंकि बाप के साथ बच्चों ने भी ब्राह्मण जीवन में सर्व आत्माओं को बहुत-बहुत-बहुत सुख-शान्ति, खुशी और शक्ति का सहयोग मिला है। इस सहयोग के कारण सब दिल से शिव और सालिग्राम दोनों का बर्थ-डे शिव जयन्ती मनाते हैं। तो ऐसे सालीग्राम बच्चों को शिव बाप और ब्रह्मा बाप दोनों की सदा पदमगुणा बधाईयां हों, बधाईयां हों। सदा बधाई हो, सदा वृद्धि हो और सदा विधिपूर्वक सिद्धि को प्राप्त हो। अच्छा।

विदाई के समय:- गुड मार्निंग तो सब करते हैं लेकिन आपकी गॉड के साथ मार्निंग है तो गॉडली मार्निंग हो गई ना। गॉड के साथ रात बिताई और गॉड के साथ मार्निंग मना रहे हो। तो सदा गॉड और गुड दोनों ही याद रहें। गॉड की याद ही गुड बनाती है। अगर गॉड की याद नहीं तो गुड नहीं बन सकते। आप सबकी सदा ही गॉडली लाइफ है, इसलिए हर सेकण्ड, हर संकल्प गुड ही गुड है। तो सिर्फ गुड मार्निंग, गुड इवनिंग, गुड नाइट नहीं लेकिन हर सेकण्ड, हर संकल्प गॉड की याद के कारण गुड है। ऐसे अनुभव करते हो। अभी जीवन ही गुड है क्योंकि जीवन ही गॉड के साथ है। हर कर्म बाप के साथ करते हो ना। अकेले तो नहीं करते? खाते हो तो बाप के साथ या अकेले खा लेते हो। सदा गॉड और गुड दोनों का सम्बन्ध याद रखो और जीवन में लाओ। समझा - अच्छा सभी को बापदादा का विशेष अमृतवेले का अमर यादप्यार और नमस्ते।
वरदान:-
महादानी बन फ्राकदिली से खुशी का खजाना बांटने वाले मास्टर रहमदिल भव
लोग अल्पकाल की खुशी प्राप्त करने के लिए कितना समय वा धन खर्च करते हैं फिर भी सच्ची खुशी नहीं मिलती, ऐसे आवश्यकता के समय आप आत्माओं को महादानी बन फ्राकदिली से खुशी का दान देना है। इसके लिए रहमदिल का गुण इमर्ज करो। आपके जड़ चित्र वरदान दे रहे हैं तो आप भी चैतन्य में रहमदिल बन बांटते जाओ, क्योंकि परवश आत्मायें हैं। कभी ये नहीं सोचो कि ये तो सुनने वाले ही नहीं है, आप रहमदिल बन देते जाओ। आपकी शुभ भावना उन्हों को फल अवश्य देगी।
स्लोगन:-
योग की शक्ति द्वारा हर कर्मेन्द्रिय को ऑर्डर में चलाने वाले ही स्वराज्य अधिकारी हैं।

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