Saturday, 6 October 2018

Brahma Kumaris Murli 07 October 2018 (HINDI) Madhuban BK Murli Today

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – 07 October 2018


07/10/2018 प्रात:मुरली ओम् शान्ति ''अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज: 22/01/84 मधुबन
BK Murli is available to 'read' and to 'listen' Daily Murli in Hindi and English.'' Om Shanti. Shiv baba ke madhur Mahavakya. Brahma Kumaris BaapDada ki murli. Bk Murli Audio recorded by service team of sisters of bkdrluhar.com website


नामीग्रामी सेवाधारी बनने की विधि
आज बापदादा अपने एक टिक जगते हुए दीपकों की दीपमाला को देख रहे हैं। कैसे हर एक जगा हुआ दीपक अचल निर्विघ्न, अपनी ज्योति से विश्व को रोशनी दे रहे हैं। यह दीपकों की रोशनी आत्मा को जगाने की रोशनी है। विश्व की सर्व आत्माओं के आगे जो अज्ञान का आवरण है, उसको मिटाने के लिए कैसे जागकर और जगा रहे हैं, अंधकार के कारण अनेक प्रकार की ठोकरें खाने वाले आप जगे हुए दीपकों की तरफ बड़े प्यार से रोशनी की इच्छा से, आवश्यकता से, आप दीपकों की तरफ देख रहे हैं। ऐसे अंधकार में भटकने वाली आत्माओं को ज्ञान की रोशनी दो, जो घर-घर में दीपक जग जायें। (बत्ती चली गई) अभी भी देखो अंधकार अच्छा लगा? रोशनी प्रिय लगती है ना। तो ऐसे बाप से कनेक्शन जुड़ाओ। कनेक्शन जोड़ने का ज्ञान दो।

सभी डबल विदेशी रिफ्रेश हो अर्थात् शक्तिशाली बन, लाइट हाउस, माइट हाउस बन नॉलेजफुल बन पावरफुल बन, सक्सेसफुल बन करके सेवास्थानों पर जा रहे हो फिर से आने के लिए। जाना अर्थात् सफलता स्वरूप का पार्ट बजाकर एक से अनेक हो करके आना। जाते हो अन्य अपने परिवार की आत्माओं को बाप के घर में ले आने के लिए। जैसे हद की लड़ाई करने वाले योद्धे बाहुबल, साइन्स बल वाले योद्धे सर्व शस्त्रों से सजकर युद्ध के मैदान पर जाते हैं, विजय का मैडल लेने के लिए। 
Brahma Kumaris Murli 07 October 2018 (HINDI)
Brahma Kumaris Murli 07 October 2018 (HINDI)
ऐसे आप सभी रूहानी योद्धे सेवा के मैदान पर जा रहे हो विजय का झण्डा लहराने के लिए। जितना-जितना विजयी बनते हो उतना बाप द्वारा स्नेह, सहयोग, समीपता, सम्पूर्णता के विजयी मैडल्स प्राप्त करते हो। तो यह चेक करो कि अब तक कितने मैडल्स मिले हैं? जो विशेषताऍ हैं वा टाइटल्स देते हैं वह कितने मैडल्स धारण किये हैं। विशेष टाइटल्स की लिस्ट निकाली है ना, वह लिस्ट सामने रखकर स्वयं को देखना कि यह सब मैडल्स हमें प्राप्त हैं? अभी तो यह बहुत थोड़े निकाले हैं। कम से कम 108 तो होने चाहिए। और अपने इतने मैडल्स को देख नशे में रहो। कितने मैडल्स से सजे हुए हो। जाना अर्थात् विशेषता का कार्य कर सदा नये ते नये मैडल्स लेते जाना। जैसा कार्य वैसा मैडल मिलता है। तो इस वर्ष हर एक सेवा के निमित्त बने हुए बच्चों को यह लक्ष्य रखना है कि कोई न कोई ऐसा नवीनता का विशेष कार्य करें जो अब तक ड्रामा में छिपा हुआ, नूँधा हुआ है। उस कार्य को प्रत्यक्ष करें। जैसे लौकिक कार्य में कोई विशेषता का कार्य करते हैं तो नामीग्रामी बन जाते हैं। चारों ओर विशेषता के साथ विशेष आत्मा का नाम हो जाता है। ऐसे हरेक समझे कि मुझे विशेष कार्य करना है। विजय का मैडल लेना है। ब्राह्मण परिवार के बीच विशेष सेवाधारियों की लिस्ट में नामीग्रामी बनना है। रूहानी नशे में रहना है। नाम के नशे में नहीं। रूहानी सेवा के नशे में निमित्त और निर्माण के सर्टीफिकेट सहित नामीग्रामी होना है।

आज डबल विदेशी ग्रुप का विजयी बन विजय स्थल पर जाने का बधाई समारोह है। कोई भी विजय स्थल पर जाते हैं तो बड़ी धूमधाम से खुशी के बाजे गाजे से विजय का तिलक लगाकर बधाई मनाई जाती है। विदाई नहीं, बधाई क्योंकि बापदादा और परिवार जानते हैं कि ऐसे सेवाधारियों की विजय निश्चित है इसलिए बधाई का समारोह मनाते हैं। विजय हुई पड़ी है ना। सिर्फ निमित्त बन रिपीट करना है क्योंकि करने से निमित्त बन करेंगे और पायेंगे! जो निमित्त कर्म है और निश्चित प्रत्यक्ष फल है! इस निश्चय के उमंग-उत्साह से जा रहे हो औरों को अधिकारी बनाकर ले आने के लिए। अधिकार का अखुट खजाना महादानी बन दान पुण्य करने के लिए जा रहे हो। अब देखेंगे पाण्डव आगे जाते हैं वा शक्तियाँ आगे जाती हैं। विशेष नया कार्य कौन करते हैं, उसका मैडल मिलेगा। चाहे कोई ऐसी विशेष सेवा के निमित्त आत्माओं को निकालो। चाहे सेवा के स्थान और वृद्धि को प्राप्त कराओ। चाहे चारों ओर नाम फैलने का कोई विशेष कार्य करके दिखाओ। चाहे ऐसा बड़ा ग्रुप तैयार कर बापदादा के सामने लाओ। किसी भी प्रकार की विशेष सेवा करने वाले को विजय का मैडल मिलेगा। ऐसे विशेष कार्य करने वाले को सब सहयोग भी मिल जाता है। स्वयं ही कोई टिकेट भी आफर कर लेंगे। शुरू-शुरू में जब आप सभी सेवा पर निकले थे तो सेवा कर फर्स्टक्लास में सफर करते थे। और अभी टिकेट भी लेते और सेकण्ड थर्ड में आते। ऐसी कोई कम्पनी की सेवा करो, सब हो जायेगा। सेवाधारी को साधन भी मिल जाता है। समझा! सभी सन्तुष्ट होकर विजयी बनकर जा रहे हैं ना। किसी भी प्रकार की कमजोरी अपने साथ तो नहीं ले जा रहे हो। कमजोरियों को स्वाहा कर शक्तिशाली आत्मायें बनकर जा रहे हो ना! कोई कमज़ोरी रह तो नहीं गई! अगर कुछ रह गया हो जो स्पेशल समय लेकर समाप्ति करके जाना। अच्छा!

ऐसे सदा अचल, जगे हुए दीपक सदा ज्ञान रोशनी द्वारा अंधकार को मिटाने वाले, हर समय सेवा की विशेषता में विशेष पार्ट बजाने वाले, बाप द्वारा सर्व प्राप्त हुए मैडल्स को धारण करने वाले, सदा विजय निश्चित के निश्चय में रहने वाले, ऐसे अविनाशी विजय के तिलकधारी, सदा सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न, सन्तुष्ट आत्माओं को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते!

जगदीश भाई से - बापदादा के साकार पालना के पले हुए रत्नों की वैल्यु होती है। जैसे लौकिक रीति में भी पेड़ (वृक्ष) में पके हुए फल कितने शोभनिक होते हैं। ऐसे आप अनुभवी आत्माओं को सभी कितना प्यार से देखते हैं। पहले मिलन में ही वरदान पा लिया ना। पालना अर्थात् वृद्धि ही वरदानों से हुई ना इसलिए सदा पालना के अनुभव से अनेक आत्माओं की पालना करते उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहेंगे। सागर के भिन्न-भिन्न सम्बन्ध की लहरों में, अनुभवों की लहरों में लहराते रहेंगे। सेवा के आदि में एकॉनामी के समय निमित्त बने। एकॉनामी के समय निमित्त बनने के कारण सेवा का फल सदा श्रेष्ठ है। समय प्रमाण सहयोगी बने इसलिए वरदान मिला। अच्छा -

कानफ्रेन्स के प्रति - सभी मिलकर जब कोई एक उमंग-उत्साह से कार्य करते हैं तो उसमें सफलता सहज होती है। सभी के उमंग से कार्य हो रहा है ना तो सफलता अवश्य होगी। सभी को मिलाना यह भी एक श्रेष्ठता की निशानी है। सभी के मिलने से अन्य आत्मायें भी मिलन मनाने के समीप आती हैं। दिल का संकल्प मिलाना अर्थात् अनेक आत्माओं का मिलन मनाना। इसी लक्ष्य को देखते हुए कर रहे हो और करते रहेंगे। अच्छा - फारेनर्स सब ठीक हैं? सन्तुष्ट हैं? अभी सब बड़े हो गये हैं। सम्भालने वाले हैं। पहले छोटे-छोटे थे तो नाज़-नखरे करते थे, अभी औरों को सम्भालने वाले बन गये। हमें कोई सम्भाले, यह नहीं। अभी मेहनत लेने वाले नहीं, मेहनत देने वाले। कम्पलेन्ट करने वाले नहीं, कम्पलीट । कोई भी कम्पलेन्ट अभी भी नहीं, फिर पीछे भी नहीं, ऐसा है ना! सदा खुशखबरी के समाचार देना। और जो नहीं भी आये हैं उन्हों को भी मायाजीत बनाना। फिर ज्यादा पत्र नहीं लिखने पड़ेंगे। बस सिर्फ ओ.के.। अच्छी-अच्छी बातें भले लिखो लेकिन शार्ट में। अच्छा।

टीचर्स से:- बापदादा का टीचर्स से विशेष प्यार है क्योंकि समान हैं। बाप भी टीचर और आप मास्टर टीचर। वैसे भी समान प्यारे लगते हैं। बहुत अच्छा उमंग-उत्साह से सेवा में आगे बढ़ रही हो। सभी चक्रवर्ती हो। चक्र लगाते अनेक आत्माओं के सम्बन्ध में आए, अनेक आत्माओं को समीप लाने का कार्य कर रही हो। बापदादा खुश हैं। ऐसे लगता है ना कि बापदादा हमारे पर खुश हैं, या समझती हो कि अभी थोड़ा सा और खुश करना है। खुश हैं और भी खुश करना है। मेहनत अच्छी करती हो, मेहनत मुहब्बत से करती हो इसलिए मेहनत नहीं लगती। बापदादा सर्विसएबुल बच्चों को सदा ही सिर का ताज कहते हैं। सिरताज हो। बापदादा बच्चों के उमंग-उत्साह को देख और आगे उमंग-उत्साह बढ़ाने का सहयोग देते हैं। एक कदम बच्चों का, पदम कदम बाप के। जहाँ हिम्मत है वहाँ उल्लास की प्राप्ति स्वत: होती है। हिम्मत है तो बाप की मदद है, इसलिए बेपरवाह बादशाह हो, सेवा करते चलो। सफलता मिलती रहेगी। अच्छा -

07-10-18 प्रात:मुरली ओम् शान्ति ''अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज 13-02-84 मधुबन

''अशान्ति का कारण अप्राप्ति और अप्राप्ति का कारण अपवित्रता है''

(कान्फ्रेन्स के पश्चात मेहमानों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात)

आज प्रेम के सागर, शान्ति के सागर बाप अपने शान्त प्रिय, प्रेम स्वरूप बच्चों से मिलने आये हैं। बापदादा सारे विश्व के आत्माओं की एक ही आश शान्ति और सच्चे प्यार को देख सर्व बच्चों की यह आश पूर्ण करने के लिए सहज विधि बताने बच्चों के पास पहुँच गये हैं। बहुत समय से भिन्न-भिन्न रूपों से इसी आश को पूर्ण करने के लिए बच्चों ने जो प्रयत्न किये वह देख-देख रहमदिल बाप को, बच्चों पर रहम आता है, दाता के बच्चे और मांग रहे हैं एक घड़ी के लिए, थोड़े समय के लिए शान्ति दे दो। अधिकारी बच्चे भिखारी बन शान्ति और स्नेह के लिए भटक रहे हैं। भटकते-भटकते कई बच्चे दिलशिकस्त बन गये हैं। प्रश्न उठता है कि क्या अविनाशी शान्ति विश्व में हो सकती है? सर्व आत्माओं में नि:स्वार्थ सच्चा स्नेह हो सकता है?

बच्चों के इसी प्रश्न का उत्तर देने के लिए बाप को स्वयं आना ही पड़ा। बापदादा बच्चों को यही खुशखबरी बताने के लिए आये हैं कि तुम ही मेरे बच्चे कल शान्ति और सुखमय दुनिया के मालिक थे। सर्व आत्मायें सच्चे स्नेह के सूत्र में बंधी हुई थी। शान्ति और प्रेम तो आपके जीवन की विशेषता थी। प्यार का संसार, सुख का संसार, जीवन मुक्त संसार जिसकी अभी आश रखते हो, सोचते हो कि ऐसा होना चाहिए, उसी संसार के कल मालिक थे। आज वह संसार बना रहे हो और कल फिर उसी संसार में होंगे। कल की ही तो बात है। यही आपकी भूमि कल स्वर्ग भूमि होगी, क्या भूल गये हो? अपना राज्य, सुख सम्पन्न राज्य जहाँ दु:ख अशान्ति का नाम निशान नहीं, अप्राप्ति नहीं। अप्राप्ति ही अशान्ति का कारण है और अप्राप्ति का कारण है अपवित्रता। तो जहाँ अपवित्रता नहीं, अप्राप्ति नहीं वहाँ क्या होगा? जो इच्छा है, जो प्लैन सोचते हो वह प्रैक्टिकल में होगा। वह ड्रामा की भावी अटल अचल है, इसको कोई बदल नहीं सकता। बनी बनाई बनी हुई है। बाप द्वारा नई रचना हो ही गई है। आप सब कौन हो? नई रचना के फाउन्डेशन स्टोन आप हो। अपने को ऐसे फाउन्डेशन स्टोन समझते हो तब तो यहाँ आये हो ना! ब्राह्मण आत्मा अर्थात् नई दुनिया के आधार मूर्त। बापदादा ऐसे आधार मूर्त बच्चों को देख हर्षित होते हैं। बापदादा भी गीत गाते हैं वाह मेरे लाडले सिकीलधे मीठे-मीठे बच्चे! आप भी गीत गाते हो ना। आप कहते हो तुम ही मेरे और बाप भी कहते तुम ही मेरे। बचपन में यह गीत बहुत गाते थे ना। (दो तीन बहनों ने वह गीत गाया और बापदादा रिटर्न में रेसपान्ड दे रहे थे।)

बापदादा तो दिल का आवाज सुनते हैं। मुख का आवाज भले कैसा भी हो। बाप ने गीत बनाया और बच्चों ने गाया। अच्छा। (कुछ भाई बहनें नीचे हाल में तथा ओम् शान्ति भवन में मुरली सुन रहे हैं, बापदादा सम्मेलन में आये हुए मेहमानों से मेडीटेशन हाल में मिल रहे हैं) नीचे भी बहुत बच्चे बैठे हुए हैं। स्नेह की सूरतें और मीठे-मीठे उल्हनें बापदादा सुन रहे हैं। सभी बच्चों ने दिल वा जान सिक वा प्रेम से विश्व सेवा का पार्ट बजाया। बापदादा सभी की लगन पर सभी को स्नेह के झूले में झुलाते हुए मुबारक दे रहे हैं। जीते रहो, बढ़ते रहो, उड़ते रहो, सदा सफल रहो। सभी के स्नेह के सहयोग ने विश्व के कार्य को सफल किया। अगर एक-एक बच्चे की मुहब्बत भरी मेहनत को देखें तो बापदादा दिन-रात वर्णन करते रहें तो भी कम हो जायेगा। जैसे बाप की महिमा अपरम-अपार है ऐसे बाप के सेवाधारी बच्चों की महिमा भी अपरम-अपार है। एक लगन, एक उमंग एक दृढ़ संकल्प कि हमें विश्व की सर्व आत्माओं को शान्ति का सन्देश जरूर देना ही है। इसी लगन के प्रत्यक्ष स्वरूप में सफलता है और सदा ही रहेगी। दूर वाले भी समीप ही हैं। नीचे नहीं बैठे हैं लेकिन बापदादा के नयनों पर हैं। कोई ट्रेन में, कोई बस में जा रहे हैं लेकिन सभी बाप को याद हैं। उन्हों के मन का संकल्प भी बापदादा के पास पहुँच रहा है। अच्छा।

बाप के घर में मेहमान नहीं लेकिन महान आत्मा बनने वाले आये हैं। बापदादा तो सभी को आई.पी. या वी.आई.पी. नहीं देखते लेकिन सिकीलधे बच्चे देखते हैं। वी.आई.पी. तो आयेंगे और थोड़ा समय देख, सुनकर चले जायेंगे। लेकिन बच्चे सदा दिल पर रहते हैं। चाहे कहीं भी जायेंगे लेकिन रहेंगे दिल पर। अपने वा बाप के घर में पहुँचने की मुबारक हो। बापदादा सभी बच्चों को मधुबन का अर्थात् अपने घर का श्रृंगार समझते हैं। बच्चे घर का श्रृंगार हैं। आप सभी कौन हो? श्रृंगार हो ना। अच्छा।

ऐसे सदा दृढ़ संकल्पधारी, सफलता के सितारे, सदा दिलतख्तनशीन, सदा याद और सेवा की लगन में मगन रहने वाले, नई रचना के आधार मूर्त, विश्व को सदा के लिए नई रोशनी नई जीवन देने वाले, सर्व को सच्चे स्नेह का अनुभव कराने वाले, स्नेही सहयोगी, निरन्तर साथी बच्चों को बापदादा का याद-प्यार और नमस्ते।
वरदान:-
अपने हर कर्म द्वारा दिव्यता की अनुभूति कराने वाले दिव्य जीवनधारी भव
बापदादा ने हर एक बच्चे को दिव्य जीवन अर्थात् दिव्य संकल्प, दिव्य बोल, दिव्य कर्म करने वाली दिव्य मूर्तियां बनाया है। दिव्यता संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ श्रृंगार है। दिव्य-जीवनधारी आत्मा किसी भी आत्मा को अपने हर कर्म द्वारा साधारणता से परे दिव्यता की अनुभूतियां करायेगी। दिव्य जन्मधारी ब्राह्मण तन से साधारण कर्म और मन से साधारण संकल्प कर नहीं सकते। वे धन को भी साधारण रीति से कार्य में नहीं लगा सकते।
स्लोगन:-
दिल से सदा यही गाते रहो कि पाना था सो पा लिया...तो चेहरा खुशनुम: रहेगा।

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