Sunday, 23 September 2018

Brahma Kumaris Murli 24 September 2018 (HINDI) Madhuban BK Murli Today

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – 24 September 2018


24/09/2018 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
BK Murli is available to 'read' and to 'listen' Daily Murli in Hindi and English.'' Om Shanti. Shiv baba ke madhur Mahavakya. Brahma Kumaris BaapDada ki murli. Bk Murli Audio recorded by service team of sisters of bkdrluhar.com website


''मीठे बच्चे - तुम्हारा मगज़ (दिमाग) खुशी से सदा भरपूर होना चाहिए क्योंकि तुम अभी बाप के समान मास्टर नॉलेजफुल बने हो''
प्रश्न:
तुम बच्चे 21 जन्मों के लिए किस आधार पर मालामाल बनते हो?
उत्तर:
संगम पर तुम डायरेक्ट बाप को अपना सब कुछ देते हो। सब बाप के हवाले कर देते हो इसके रिटर्न में तुम 21 जन्मों के लिए मालामाल बन जाते हो। बाबा कहते इस समय तुम्हारे पास जो कूड़ा किचड़ा है वह मुझे दे दो, मरने के पहले अपना सब कुछ ट्रान्सफर कर दो तो भविष्य में उसका रिटर्न मिल जायेगा।
गीत:-
ओम् नमो शिवाए........  
Brahma Kumaris Murli 24 September 2018 (HINDI)
Brahma Kumaris Murli 24 September 2018 (HINDI)
ओम् शान्ति।
सालिग्रामों प्रति शिव भगवानुवाच। रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप समझा रहे हैं। अभी तुम बच्चे जानते हो यहाँ हमको आत्मा समझ बैठना है, न कि शरीर और सारी दुनिया में एक भी ऐसा मनुष्य नहीं है जो यह समझते हों कि आत्मा क्या है। आत्मा को ही नहीं जानते तो फिर परमात्मा को भी कैसे समझेंगे? बाप द्वारा ही आत्मा की समझानी मिलती है। आत्मा और परमात्मा को ही नहीं जानते इसलिए ही मनुष्य दु:खी हैं। अभी तुम बच्चों को यह मालूम हुआ है कि इस ड्रामा की अथवा कल्प वृक्ष की आयु 5 हजार वर्ष है। यह तो समझते हो उन्हों का बीज अगर चैतन्य होता तो बतलाता ना कि मुझ बीज से झाड़ ऐसे पैदा हुआ। अब वह तो है जड़, यह चैतन्य एक ही मनुष्य सृष्टि का वैराइटी झाड़ है। तुम बच्चों को अभी सारी नॉलेज है। तुम्हारे में भी नम्बरवार पुरुषार्थ अनुसार शुरू से लेकर अन्त तक सारे झाड़ का ज्ञान मिला हुआ है। जैसे बीज में सारे झाड़ का ज्ञान होता है। यह बाप है चैतन्य बीजरूप, गाते भी हैं परमपिता परमात्मा सत-चित-आनंद स्वरूप है। निराकार की महिमा गाई जाती है। उनकी महिमा सबसे बिल्कुल ही न्यारी है। मनुष्य तो कुछ भी नहीं जानते हैं। भल देवताओं को यह वर्सा यहाँ से ही मिलता है परन्तु उनको भी वहाँ यह ज्ञान नहीं रहता। वन्डरफुल बात है ना। यहाँ अभी तुमको सारा ज्ञान मिलता है। बुद्धि में नॉलेज है - यह सृष्टि चक्र कैसे फिरता है। बाप आकरके नई राजधानी स्थापन करते हैं। तुम इस ड्रामा के एक्टर्स हो। सिर्फ तुमको ही ड्रामा के आदि-मध्य-अन्त, रचता और रचना का ज्ञान है और किसको है नहीं। न शूद्र वर्ण को यह ज्ञान है, न देवता वर्ण को यह ज्ञान है। कोई सुनेंगे तो वन्डर खायेंगे। मनुष्य कहते हैं यह त्योहार आदि जो मनाते हैं, वह परमपरा से चले आये हैं। परन्तु बाप समझाते हैं सतयुग में तो यह होते ही नहीं। त्योहारों को कोई जानते ही नहीं। अभी तो कहते हैं ना यह दशहरा, दीवाली आदि त्योहार आने हैं। वहाँ तो यह कुछ भी याद नहीं रहता। एकदम निष्फुरने (निश्चिंत) हो राज्य करते रहेंगे।

अभी यहाँ तुम्हारी बुद्धि का ताला खुला हुआ है। तुम एक्टर्स हो। इस ड्रामा के क्रियेटर, डायरेक्टर, मुख्य एक्टर्स, ड्युरेशन आदि को जानते हो। यह नॉलेज जिसकी बुद्धि में रहेगी, उनको अपार खुशी रहेगी। गॉड फादर को ही नॉलेजफुल ज्ञान सागर कहा जाता है। कौनसी नॉलेज है? सिवाए तुम्हारे यह कोई भी समझ न सके। गॉड को ही नॉलेजफुल, वर्ल्ड आलमाइटी अथॉरिटी कहा जाता है। तो नॉलेज किसकी है? सभी वेदों, शास्त्रों, ग्रंथों, सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त की। शास्त्रों में यह ज्ञान नहीं है। वह है ही भक्ति मार्ग के शास्त्र, सिर्फ पूजा करते रहो। बाकी रचयिता और रचना की नॉलेज कुछ भी नहीं है। तब तो ऋषि-मुनि आदि भी कहते थे कि हम रचता और रचना को नहीं जानते। समझाने वाला एक ही बाप है। तो जानेंगे फिर कहाँ से। अभी तुम बाप द्वारा सुनते हो फिर यह नॉलेज प्राय:लोप हो जाती है। यह नॉलेज सिवाए तुम बच्चों के और कोई नहीं जानते। तुमको कितनी बड़ी नॉलेज मिलती है। तो तुम बच्चों को कितनी खुशी होनी चाहिए! वह लोग डॉक्टरी आदि पढ़ने के लिए, सीखने के लिए विलायत में जाते हैं। तुमको तो यहाँ ऐसा बनाते हैं जो वहाँ यह डॉक्टर आदि होते ही नहीं। बेहद का बाप जो नॉलेजफुल है, उन द्वारा हम सब कुछ जान जाते हैं। उनकी हम सन्तान हैं। तो ज्ञान से मगज़ (दिमाग) कितना भरपूर रहना चाहिए। कितनी खुशी होनी चाहिए। ऐसी कोई चीज नहीं जिसको हम न जानते हो। वह लोग जो कुछ पढ़ते हैं वह तो कुछ नहीं है। भक्ति मार्ग के शास्त्र आदि कितने पढ़ते हैं। परन्तु यह तो कोई नहीं जानते कि यह सृष्टि चक्र कैसे फिरता है? तुम बच्चे अभी मास्टर नॉलेजफुल बनते हो। नटशेल में तो सब जान चुके हो। बाकी सिर्फ आत्मा जो तमोप्रधान है उनको सतोप्रधान बनाना है। कोई हैं जो तमोप्रधान से तमो बने होंगे, कोई तमो से रजो बने होंगे, कोई रजो से सतो बने होंगे। सतोप्रधान नहीं कहेंगे। सतोप्रधान जब बन जायेंगे तो नम्बरवार पुरुषार्थ अनुसार कर्मातीत अवस्था आ जायेगी फिर तो नई दुनिया चाहिए राजाई के लिए इसलिए पुरानी दुनिया का विनाश होता है। जब यह यज्ञ पूरा होगा तो सारी पुरानी दुनिया की आहुति पड़ेगी। यह पढ़ाई पूरी हो जायेगी फिर नम्बरवार पुरुषार्थ अनुसार कर्मातीत अवस्था को पा लेंगे। जैसे वह भी इम्तहान पास कर फिर ट्रांसफर हो जाते हैं, तुम भी मृत्युलोक से ट्रांसफर हो अमरलोक में चले जायेंगे। हम अमरलोक में थे फिर 84 जन्म लेते-लेते मृत्युलोक में आ गये हैं।

तुम कहते हो अभी हम पढ़ रहे हैं फिर अमरलोक में जाकर देवी-देवता बनेंगे। बाप ही मनुष्य से देवता बनाते हैं। पतितों को पावन देवी-देवता कौन बनायेगा? देवता तो यहाँ कोई है नहीं, जो देवी-देवता बनावे। लक्ष्मी-नारायण चाहिए ना। वह तो यहाँ होते नहीं। तुम बच्चे जानते हो इस समय बाप ही आकर पढ़ाते हैं। स्वर्ग का राज्य भाग्य देते हैं। स्वर्ग था, लक्ष्मी-नारायण का राज्य था ना। इन्हों की यह राजाई किसने स्थापन की? हेविनली गॉड फादर ने ही पैराडाइज सतयुग स्थापन किया, जहाँ देवी-देवता राज्य करते थे। वहाँ दूसरा कोई खण्ड था नहीं। एक ही भारत था। तुम्हारी बुद्धि में है - हम जब राज्य करेंगे तो दूसरा कोई नहीं होगा। तुम्हारी बुद्धि में यह सारा झाड़ है, इसका बीज ऊपर में है। वह सत है, चैतन्य है। आत्मा भी इम्पैरेसिबुल है। बाबा भी इम्पेरेसिबुल है। जो बाबा में ज्ञान है वह तुमको सुनाते हैं। सारा झाड़ खड़ा है, बाबा ऊपर में है। इस समय मनुष्य तमोप्रधान कांटे हैं। झाड़ पुराना होने से जैसे सूख जाता है इसलिए इनको कहा जाता है कांटों का जंगल। वहाँ होता है फूलों का बगीचा। बागवान भी है, किसको खिवैया, किसको बागवान, किसको माली कहते हैं। बाप है खिवैया। तुम भी बोट चलाना सीख रहे हो। हरेक की नईया बहुत पुरानी हो गई है। नईया आत्मा और शरीर दोनों की बनी हुई है। गाते भी हैं - नईया मेरी पार लगाओ। अब नईया भी पुरानी तो शरीर भी पुराना। अब पार कैसे हो और कहाँ जायें? तुम जानते हो पार किसको कहा जाता है, मुक्तिधाम, जीवनमुक्तिधाम क्या चीज़ है! बरोबर बाप अभी पार ले जाते हैं, दु:खधाम से सुखधाम अथवा विषय सागर से क्षीरसागर में ले जाते हैं। वह सिर्फ गाते हैं नईया मेरी पार लगाओ, बागवान आओ, कांटों को फूल बनाओ। तुम भी पहले नहीं जानते थे। अभी मूलवतन, सूक्ष्मवतन, सतयुग से लेकर कलियुग तक सब राज़ को जान गये हो। जो जानते हैं वही सुनाते हैं। अन्दर ज्ञान टपकता रहे तो सदैव खुशी में रहेंगे। कोई चिंता की बात ही नहीं रहती, फिक्र से फ़ारिग हो जाते हो।

तुम जानते हो बाबा हमको ले जाते हैं, अब हम बाबा जैसे बन रहे हैं। बच्चा बाप समान बनता है ना। बाबा नॉलेजफुल है, तुमको भी नॉलेजफुल बनाया है। आत्माओं का कनेक्शन है ही परमात्मा बाप से। आत्मा कहती है जो बाबा में नॉलेज है, वह हम आत्माओं को दे रहे हैं। तुम हो रूहानी बाप के रूहानी बच्चे। यह भी नई बात है ना। बाबा बिगर कोई सुना न सके। वह निराकार बाप भी साकार के आधार से सुनाते हैं। नहीं तो तुम सुन न सको। बच्चों को बाप आप समान बनाते हैं। दु:ख हर्ता, सुख कर्ता वह बाप है। उनकी जो महिमा है वह तुम्हारी भी है, कोई फ़र्क नहीं। बाकी क्या फ़र्क रहता है? हम जन्म-मरण में नहीं आते हैं, तुम जन्म-मरण में आते हो। मुझे ज्ञान सागर कहते हैं तो मैं तुम बच्चों को ज्ञान देता हूँ। मैं सुख का सागर, पवित्रता का सागर, शान्ति का सागर हूँ, तो तुमको भी यह वर्सा देता हूँ।

तुम जानते हो यह सारा चक्र फिर 5 हजार वर्ष बाद फिरेगा। यह नॉलेज है सोर्स आफ इनकम। जितना पढ़ते हैं उतना नॉलेज से इनकम होती है। यह नॉलेज भी है तो धंधा भी है। शर्राफ लोग सट्टा करते हैं, तुम क्या देते हो? कूड़ा-किचड़ा। मरने के बाद करनीघोर को कूड़ा-किचड़ा ही देते हैं। तुमको तो जीते जी देना है। ईश्वर अर्थ देते हैं। अब क्या ईश्वर को पुराना खटिया आदि देंगे? बाप कहते हैं तुम मरने से पहले ही सब दे दो। यह पुरानी चीज़ तुम्हारे काम में ही नहीं आयेगी। भल कोई कितना भी साहूकार हो परन्तु कितने दिन के लिए होगा? एक जन्म के लिए, फिर कर्मों अनुसार पता नहीं कहाँ जाकर जन्म लेंगे। तुम तो बाप से 21 जन्मों के लिए लेते हो पुरुषार्थ अनुसार।

यह है रूहानी सर्विस। सारी दुनिया जानती है जिस्मानी सर्विस को। रूहानी को कोई जानते ही नहीं। सुप्रीम रूह ही आकर नॉलेज देते हैं। उस सुप्रीम का जन्म भी मनाते हैं। उनको ही सुख का सागर, शान्ति का सागर, दु:ख हर्ता, सुख कर्ता कहते हैं। शिव नाम है ना। जयन्ती भी मनाते हैं। परन्तु बुद्धि में कुछ नहीं है। बाप ही यह सब राज़ सुनाते हैं। फिर 5 हजार वर्ष बाद सुनायेंगे। यह ज्ञान सतयुग में नहीं होता क्योंकि आत्मायें सतोप्रधान हैं। ज्ञान से ही वह ऐसी बनती हैं। यह नई बातें हैं ना। मन्दिर बनाने वाले भी यह नहीं जानते कि लक्ष्मी-नारायण का मन्दिर हम क्यों बनाते हैं? उन्हों को यह राज्य किसने दिया? कैसे यह पद पाया? कहते हैं ना कर्मों का फल है। अभी बाप बैठ कर्म-अकर्म-विकर्म की गति का राज़ समझाते हैं। उन्हों ने भी यह नॉलेज सुनी होगी। है ही भगवानुवाच - गीता से ही आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना हुई। वहाँ बहुत थोड़े मनुष्य होते हैं। बाकी सारी पुरानी सृष्टि कहाँ गई? जरूर विनाश हुआ होगा। महाभारत लड़ाई भी गाई हुई है। गिरधर कविराज कहते हैं। अब गिरधर तो कहते हैं कृष्ण को। कवि कौन है? शिवबाबा को कवि कहा जाता है। कवि अर्थात् सुनाने वाला।

तुम जानते हो आ़फतें आदि बहुत आनी हैं। पुरानी दुनिया के विनाश लिए क्या-क्या चीजें बना रहे हैं। यह वही महाभारत लड़ाई है जबकि भगवान् ने आकर रूद्र ज्ञान यज्ञ रचा है। भगवान् यज्ञ किसलिए रचते हैं? यज्ञ रचा ही जाता है सुख-शान्ति के लिए। बाप सभी का दु:ख हर्ता, सुख कर्ता है। तो इस ज्ञान यज्ञ में सारी पुरानी सृष्टि स्वाहा हो जायेगी। तुम जानते हो हम ब्राह्मण यज्ञ के सर्वेन्ट हैं। हम ब्राह्मण ब्रह्मा के सच्चे मुख वंशावली हैं तो बाबा जो मुख से कहे वह मानना पड़े। श्री श्री की श्रेष्ठ मत से ही हम श्रेष्ठ बन, रूद्र की माला का दाना बनेंगे। सिजरा बनाते हैं - वासवानी सिजरा, कृपलानी सिजरा....। तो ऊपर में है शिवबाबा, उनका है निराकारी सिजरा। निराकारी सिजरा वह फिर साकारी सिजरा होता है। पहले नम्बर में है प्रजापिता। तो वह हुआ जिस्मानी और वह रूहानी। रूहानी बाप आकर प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा रचना रचते हैं। उनको बुलाते ही हैं हे पतित-पावन आओ। पुरानी पतित दुनिया को पावन बनाने आओ। नई नहीं बनाते हैं। प्रलय होती नहीं। तो यह वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी रिपीट होती है। 84 का चक्र फिर से शुरू होता है। बेहद के बाप से बेहद की नॉलेज मिलती है, बेहद का वर्सा मिलता है। बेहद के बाप को सब याद करते हैं - हे भगवान् कहते हैं ना। हे ईश्वर, हे प्रभू कहने से कोई चित्र याद नहीं आता। निराकार याद आता है। कहते भी हैं कि भगवान् को याद करो। फादर है ना। हम सब हैं ब्रदर्स। आत्माओं के लिए कहते हैं सब ब्रदर्स हैं। सब पुकारते हैं - हे पतित-पावन, दु:ख हर्ता, सुख कर्ता, हे लिबरेटर आओ, हमको गाइड करो। घर भूल गया है। याद है परन्तु हम जा नहीं सकते हैं। योग लगाने से जैसे घृत पड़ता जाता है। आत्मा अविनाशी है ना। तो आत्मा की ज्योति सारी उझाई नहीं जाती है। तो अब योगबल का घृत डालना है। सदैव के लिए फिर दीपमाला, सोझरा हो जायेगा। दीपमाला अर्थात् घर-घर में सोझरा। तो दीपमाला कहाँ होगी? सतयुग में। यहाँ नहीं। यह सब राज़ तुम समझते हो, तुम्हारे पास ब्लाइन्डफेथ नहीं है। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
धारणा के लिए मुख्य सार:
1) चिंताओं से फ्री होने के लिए बाप समान नॉलेजफुल बनना है। बुद्धि में सदा ज्ञान का सिमरण करते रहना है।
2) रूहानी सर्विस कर अपनी प्रालब्ध बनानी है। पुराना सब कुछ ट्रांसफर कर देना है।
वरदान:
एक के पाठ द्वारा निराकार, आकार को साकार में अनुभव करने वाले वरदानी मूर्त भव!
सिर्फ एक का पाठ पक्का करके वरदाता को राज़ी कर लो तो अमृतवेले से रात तक हर दिनचर्या के कर्म में वरदानों से ही पलते, चलते, उड़ते रहेंगे। वह एक का पाठ है - एक बल एक भरोसा, एकमत, एकरस, एकता और एकान्तप्रिय ...यह ''एक'' शब्द ही बाप को प्रिय है। जो इस एक का पाठ पक्का कर लेते हैं उन्हें कभी मुश्किल का अनुभव नहीं होता। ऐसी वरदानी आत्मा को विशेष वरदान प्राप्त होता है इसलिए वे निराकार-आकार को जैसे साकार अनुभव करते हैं।
स्लोगन:
किसी से किनारा करके अपनी अवस्था बनाने के बजाए सर्व का सहारा बनो।

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