Thursday, 24 May 2018

Brahma Kumaris Murli 25 May 2018 (HINDI) Madhuban BK Murli Today


Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – 25 May 2018


25/05/18 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
BK Murli is available to 'read' and to 'listen' Daily Murli in Hindi and English.'' Om Shanti. Shiv baba ke madhur Mahavakya. Brahma Kumaris BaapDada ki murli. Bk Murli Audio recorded by service team of sisters of bkdrluhar.com website


हे मीठे लाल-रात को जागकर मोस्ट बिलवेड बाप को याद करो, देही-अभिमानी बनो, श्रीमत कहती है बाप समान निरहंकारी बनो
प्रश्न:-
शिवबाबा के साथ ब्रह्मा की मत बहुत नामीग्रामी है-क्यों?
उत्तर:-
क्योंकि ब्रह्मा बाबा शिवबाबा का एक ही मुरब्बी बच्चा है। इसे अपनी मत का अहंकार नहीं है। सदैव कहते हैं-तुम हमेशा बाप की ही श्रीमत समझो, इसमें ही तुम्हारा कल्याण है। बाबा देखो कितना निरहंकारी है, माताओं को कहते हैं वन्दे मातरम्। मातायें ज्ञान गंगा हैं, शक्ति सेना हैं, इन्हें आगे रखना है, रिगार्ड देना है। इसमें देह-अभिमान नहीं आना चाहिए।
गीत:-
जो पिया के साथ है...  

Brahma Kumaris Murli 25 May 2018 (HINDI)
Brahma Kumaris Murli 25 May 2018 (HINDI)
ओम् शान्ति।
गीत की पहली लाइन बच्चों ने सुनी। कहते हैं जो पिया के साथ है....। परन्तु साथ में इकठ्ठे रहने काक्वेश्चन ही नहीं उठता। जो बाप के बने हैं वे साथ हैं ही। जो बाप के बनते हैं वे ब्राह्मण भल कहाँ भी रहें उनके लिए तो ज्ञान बरसात है। जो शिवबाबा के पोत्रे-पोत्रियाँ बन प्रतिज्ञा करते हैं-बाबा, हम सदा पवित्र रहेंगे, ज्ञान अमृत पियेंगे-उनके लिए ही ज्ञान की बरसात है। अमृत कोई जल नहीं, जहर की भेंट में ज्ञान को अमृत कहा गया है। तो तुम हो पाण्डव सम्प्रदाय।यादव सम्प्रदाय, कौरव सम्प्रदाय का गायन है ना-क्या करत भये। तुम पाण्डवों पर है ज्ञान अमृत की बरसात। बाकी जो कौरव-यादव हैं उन पर ज्ञान अमृत की बरसात नहीं है। यह भी बच्चे जानते हैं-यादव-कौरव बहुत हैं। पाण्डव बहुत थोड़े हैं। गाया भी जाता है राम गयो, रावण गयो.. जिनकी बहुत सम्प्रदाय है। राम की सम्प्रदाय पाण्डव बहुत थोड़े हैं। यह है पाण्डव गवर्मेन्ट, श्रीमत पर चलने वाले। यह जैसे भगवान की गवर्मेन्ट है। परन्तु है गुप्त। तुम जानते हो हम श्रीमत पर चल भारत का बेड़ा पार कर रहे हैं। जो श्रीमत पर चलते हैं वे अपना बेड़ा पार करते हैं। यादव और कौरवों के पास कितने महल हैं। तुम बच्चों को कुछ भी नहीं। तीन पैर पृथ्वी के भी तुम्हारे नहीं। सब उन्हों का है। यह भी गाया हुआ है, जिनको तीन पैर पृथ्वी के नहीं मिलते थे उन्हों की विजय हुई और वह विश्व के मालिक बन गये। पाण्डव शक्ति सेना गुप्त है। शास्त्रों में भी दिखाते हैं जुआ खेला, पाण्डवों का राज्य था फिर जुआ में हराया, अभी न तो है राज्य, न है जुआ की बात। यह सब झूठ है। तुम बरोबर पाण्डव हो। शिवबाबा है रूहानी पण्डा। बच्चों को रूहानी यात्रा सिखलाने आया है। इस ब्रह्मा तन से श्रीमत देते हैं। जैसे शिवबाबा की श्रीमत गाई हुई है, वैसे ब्रह्मा की भी गाई हुई है क्योंकि फिर भी शिवबाबा का एक ही मुरब्बी बच्चा है। इस द्वारा कितने मुखवंशावली रचे जाते हैं। पवित्रता का कंगन बँधवाकर कहते हैं-जितना मेरी मत पर चलेंगे उतना मोस्ट बिलवेड बनेंगे। तुम्हारा हीरे जैसा जीवन बनेगा। शिवबाबा कहते हैं-इनका (ब्रह्मा का) और तुम्हारा कनेक्शन मेरे साथ है। हीरे जैसा जन्म तुमको मिलता है इसलिए अब देही-अभिमानी बनो। जितना शिवबाबा को याद करेंगे उतना देही-अभिमानी बनेंगे तो माया वार नहीं करेगी।

बापदादा की हमेशा बच्चों पर नजर रहती है। अगर बच्चे कुछ भी बेकायदे चलते हैं तो बापदादा का नाम बदनाम करते हैं। तो शिक्षा देनी पड़ती है-ऐसे काम नहीं करना। नाम बदनाम करने वाले के लिए कहा जाता है सतगुरू का निंदक ठौर नपाये। ऐसा कोई उल्टा कर्तव्य नहीं करना है। तुम बच्चे जानते हो-जितना बाबा को याद करेंगे उतना विकर्म विनाश होंगे। याद में रहने वाले को ही देही-अभिमानी कहा जाता है। देह-अभिमान होने से माया का वार जोर से होगा। बड़ी मंजिल है। स्कॉलरशिप लेते हैं। कितने ब्राह्मण बनने वाले हैं। गाया जाता है 33 करोड़ देवी-देवतायें। विजय माला में वह आते हैंजो देही-अभिमानी बनते हैं। देह-अभिमानी बनना माना माया का वार होना। देही-अभिमानी बनना माना बाप का बनना। यह बात बड़ी सूक्ष्म है। पुरूषार्थ कर बाप को याद करना है। वह बाप भी है, साजन भी है। अपार सुख देने वाला है। कहते हैं तुम बच्चों के लिए हथेली पर बहिश्त ले आया हूँ। सिर्फ तुम श्रीमत पर चलो। श्रीमत कहती है देही-अभिमानी भव। देह-अभिमान ने तुम्हारा बेड़ा गर्क किया है। माया तुमको देह-अभिमानी बनाती है। रूहानी बाप को सब भूले हुए हैं। अभी बापने आकर परिचय दिया है। तुम अपने को अशरीरी आत्मा समझो। मेरा तो शिवबाबा और वर्सा (स्वर्ग की राजाई) बस। देह-अभिमान में आकर मेरा कहा तो स्वर्ग का राज्य ले नहीं सकेंगे। हम आत्मा हैं-यह पक्का निश्चय करो। यह जो आत्मा सो परमात्मा का भूसा बुद्धि में भरा हुआ है, वह निकाल दो। अभी देही-अभिमानी बनो। बाप को याद करो तो तुम्हारा बेड़ा पार होगा। श्रीमत पर चलो। देही-अभिमानी नहीं बनेंगे तो माया बेड़ा गर्क कर देगी। ऐसे बहुतों का बेड़ा माया ने गर्क किया है क्योंकि श्रीमत पर नहीं चलते हैं। युद्ध का मैदान है। तुम्हें किसी भी बात में हार नहीं खानी है। काम का भूत तो एकदम पुर्जा-पुर्जा (टुकड़ा-टुकड़ा) कर देता है। सेकेण्ड नम्बर है क्रोध का भूत। क्रोध से एक दो को मारकर खलास करते हैं। यादवों का क्रोध बढ़ेगा। एकदम जैसे डेविल बन जायेंगे। क्रोध भी बड़ा भारी दुश्मन है। काम को नहीं जीता तो पवित्र दुनिया का मालिक बन नहीं सकेंगे। क्रोध दुश्मन भी ऐसा है जो खुद को भी और औरों को भी दु:ख देते हैं। यह भी है भावी। अब यादव, कौरव, पाण्डव क्या करते हैं? यह तुम ही जानते हो। यह है पाण्डव गवर्मेन्ट। अब तुम देखते हो पाण्डवों का राज्य तो है नहीं। तीन पैर पृथ्वी के भी नहीं मिलते हैं। उन्हों का तो देखो कितना दबदबा है। तुम बच्चों में बहुत थोड़े हैं जो नारायणी नशे में रहते हैं। नशे सभी में है नुकसान। देह-अभिमान में आने से बड़ा नुकसान है। तो बाप समझाते हैं तुम सदैव शिवबाबा को याद करो। ऐसे मत समझो यह ब्रह्मा ज्ञान देते हैं। समझाते हैं शिव बाबा को याद करो। शिवबाबा कहते हैं मेरे साथ योग लगाओ। यह ब्रह्मा भी मेरे साथ योग लगाते हैं। मुझे याद करेंगे तो मैं मदद करता रहूँगा। देह-अभिमानी बनने से माया वार करती रहेगी। और फिर एक दो को दु:ख देते रहेंगे। इसमें भी दो हैं बड़े दुश्मन। नम्बरवार तो होते हैं ना। काम-क्रोध है प्रत्यक्ष विकार। मोह-लोभ आदि तो गुप्त हैं। तो इन भूतों पर विजय पानी है।

बाप कहते हैं अभी तुमको तीन पैर पृथ्वी के नहीं मिलते हैं, मैं फिर तुमको विश्व का मालिक बनाता हूँ। बाप की हमेशा दिल होती है बच्चा नाम निकाले। कोई पूछे तुम किसके बच्चे हो, तो फलक से उत्तर देना चाहिए। ओहो, बाप ने बच्चों को बहुत ऊंचा बनाया है। लौकिक बच्चे होते हैं कोई इन्जीनियर, कोई बैरिस्टर, कोई क्या-तो बाप खुश होते हैं। कोई-कोई बच्चे तो बाप की इज्जत लेने में भी देरी नहीं करते हैं। तुमको तो बाप की इज्जत बढ़ानी है ना। कुल कलंकित बच्चे के लिए तो बाप कहेंगे मुआ भला। यह बाप भी ऐसे कहेंगे तुम कामी, क्रोधी बनकर ईश्वरीय कुल को कलंक लगाते हो। बाप से वर्सा तो पूरा लेना चाहिए। देखते हो यह मम्मा-बाबा पहले नम्बर में लक्ष्मी-नारायण बनते हैं। तो क्यों न हम उनके तख्त परजीत पा लें। बरोबर तुम माँ-बाप के तख्त को जीतते हो ना। बच्चे तख्त पर बैठेंगे तो खुद नीचे आ जायेंगे। अब राजधानी स्थापना हो रही है। बाप कहते हैं राजाई प्राप्त करो। प्रजा में नहीं जाना है। नारायणी नशा रहना चाहिए। भल प्रजा में भीबहुत धनवान होते हैं, परन्तु फिर भी प्रजा कहेंगे ना। राजाओं से भी प्रजा में साहूकार होते हैं। इस समय गवर्मेन्ट कंगाल है। कर्जा लेती है तो प्रजा साहूकार हुई ना। बाप समझाते हैं तुम जानते हो भारत की गवर्मेन्ट यह लक्ष्मी-नारायण थे, अब फिर बन रहे हैं। बाप की श्रीमत पर चलने से बेड़ा पार होता है। श्रेष्ठ बनेंगे। नहीं तो माया खा जायेगी। बहुतों को खा गई है। भल यहाँ से निकले हैं, बड़े लखपति बन गये हैं। भाजी (सब्जी) बेचने वाले आज करोड़पति हो गये हैं। बाबा के पास आते हैं, कहते हैं बाबा अभी तो पैसा बहुत हो गया है। बाबा कहते हैं तुम्हारे ऊपर बोझा बहुत है, शिवबाबा से तुमने पालना बहुत ली है। कर्जा हुआ ना, इसलिए खबरदार रहना। तो वे भी समझते हैं बोझा उतार लेवें। ऐसे बहुत मिलते हैं। कराची में तुम बच्चियाँ भागी थी। कुछ ले आई थी क्या? कुछ भी नहीं। शिवबाबा के खजाने से तुम्हारी परवरिश हुई। जो कोई-कोई शिवबाबा के पिछाड़ी सरेण्डर हुए उनसे तुम बच्चों की पालना हुई। इस बाबा को थोड़े-ही पता था कि यह आपस में मिलकर ऐसे आ जायेंगे। शिवबाबा ने उनकी बुद्धि में डाला और भठ्ठी बननी थी, तो सब भागकर आ गये। तो परवरिश के लिए भी कोई बलि चढ़े। फिर उनसे कई भाग गये। माया ने हार खिला दी। माया भी कोई कम समर्थ नहीं है। अब उस परजीत पानी है बाप की याद से। योग अक्षर नहीं बोलो। कई बच्चे कहते हैं योग में बिठाओ। लेकिन यह आदत पड़ जाये गीतो चलते-फिरते तुम याद नहीं कर सकेंगे। नयों को भी यह नहीं सिखाना है कि योग में बैठो। नये को तुम अपने सामने बिठाते हो तो वह नाम-रूप में फँस पड़ता है। अनुभव ऐसा कहता है, इसलिए मना की जाती है। माँ-बाप को एक जगह याद करना होता है क्या? तुम उठते-बैठते, सर्विस करते बाबा को याद करो। बाबा के जो लाल होंगे, वे रात को जागकर भी याद करते रहेंगे। ऐसा मोस्ट बिलवेड बाबा जिससे विश्व का मालिक बनते हैं, तो क्यों न उनको याद करेंगे।

पारलौकिक बाप से अथाह सुख का वर्सा मिलता है। तुम अभी से पुरूषार्थ करते हो, मेहनत करते हो जो फिर जन्म जन्मान्तर ईश्वरीय प्रालब्ध तुम भोगते हो। ऐसे नहीं, वहाँ सतयुग में तुम ऐसे कर्म करते हो तब राजाई मिलती है। नहीं, यहाँ के ही पुरूषार्थ से प्रालब्ध पाते हो। बड़ा भारी पद है। ऐसे बहुत आये फिर आश्चर्यवत सुनन्ती, कथन्ती, फिर भागन्ती हो गये। बहुत सेन्टर्स भी स्थापना करन्ती, फिर भागन्ती, गिरन्ती हो गये.. कोई सेन्टर स्थापना करके भी आहिस्ते-आहिस्ते गिर पड़ते हैं। वण्डरफुल माया है ना। माया झट नाक से पकड़ लेती है इसलिए बाप कहते हैं निरन्तर याद करो। समझो शिवबाबा समझाते हैं। इनसे मम्मा तीखी है। बाबा निराकार, निरहंकारी है। तुम बच्चों को भी समझना है, हम निराकारी आत्मा हैं, निरहंकारी बनना है तब ही वर्सा पायेंगे। देह-अभिमान नहीं आना चाहिए। बहुत मीठा बनना है। वहाँ माया होती नहीं। तो क्यों न बाप से वर्सा ले लेवें। बाबा का राइट हैण्ड बन जायें। वह कौन बनते हैं? जो सेन्टर स्थापना करते हैं। कमाल करते हैं, कितनों का कल्याण करते हैं। कोई सेन्टर्स स्थापना कर फिर चले जाते हैं। उनका भी फल मिल जाता है। एक तरफ जमा, दूसरे तरफ ना हो जाती है। यह तो बाप जानते हैं। ब्रह्मा भी जान सकते हैं। एक ही यह मुरब्बी बच्चा है। तुम सब हो पोत्रे पोत्रियाँ। तुम जानते हो मम्मा नम्बरवन जाती है। बाबा सेकेण्ड नम्बर में आते हैं। तो माताओं का रिगार्ड बहुत करना पड़े। बाबा कहते हैं वन्दे मातरम्। तो बच्चों को भी वन्दे मातरम् करना पड़े। माता बिगर उद्धार हो न सके। वास्तव में तो हैं सब सीतायें। सब सजनियाँ हैं-एक साजन की अथवा सब बच्चे हैं एक बाप के। बाप खुद कहते हैं वन्दे मातरम्। जैसे कर्म मैं करूंगा, मुझे देख बच्चे भी ऐसा करेंगे। तो माताओं की सम्भाल करनी है। इन पर अत्याचार बहुत होते हैं। कोई विघ्न डालते हैं तो भी बिचारी मातायें बाँधेली हो जाती हैं। पाप का घड़ा ऐसे भरता है, असुर मारते हैं तो पापात्मा बन पड़ते हैं। है तो सब ड्रामा अनुसार, इसको कोई मिटा नहीं सकते। कल्प पहले मुआिफक हरेक अपना वर्सा लेने वाले हैं। साक्षात्कार होता है-कौन अच्छे-अच्छे मददगार होते हैं। शिवबाबा कहते हैं मैं तो दाता हूँ, कुछ लेता नहीं हूँ। अगर यह ख्याल आता है कि हम देते हैं, अहंकार आया तो यह म्रे। शिवबाबा तो कहते हैं तुम ठिक्कर-भित्तर देकर रिटर्न में कितना लेते हो! बाबा हमेशा दाता है। शिवबाबा को मैं देता हूँ-यह बुद्धि में कभी नहीं आना चाहिए। मैं एक पैसा देकर लाख लेता हूँ, 21 जन्म के लिए राज्य-भाग्य लेता हूँ। बाप है सद्गति दाता, झोली भरने वाला। गुप्त दान करना होता है, बाबा भी गुप्त है। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद, प्यार और गुडमर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
धारणा के लिए मुख्य सार:
1) देही-अभिमानी बन माया पर जीत अवश्य पानी है। रात को जागकर भी मोस्ट बिलवेड बाप को याद करना है।
2) बाप समान निराकारी, निरहंकारी बनना है। शिवबाबा को देते हैं-यह तो संकल्प में भी नहीं लाना है।
वरदानः-
अलौकिक रीति की लेन-देन द्वारा सदा विशेषता सम्पन्न बनने वाले फ्राकदिल भव
जैसे किसी मेले में जाते हो तो पैसा देते और कोई चीज लेते हो। लेने से पहले देना होता है तो इस रूहानी मेले में भी बाप से अथवा एक दो से कुछ न कुछ लेते हो अर्थात् स्वयं में धारण करते हो। जब कोई गुण अथवा विशेषता धारण करेंगे तो साधारणता स्वत: खत्म हो जायेगी। गुण को धारण करने से कमजोरी स्वत: समाप्त हो जायेगी। तो यही देना हो जाता है। हर सेकण्ड ऐसी लेन-देन करने में फ्राकदिल बनो तो विशेषताओं से सम्पन्न बन जायेंगे।
स्लोगनः-
अपनी विशेषताओं का प्रयोग करो तो हर कदम में प्रगति का अनुभव होगा।

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