Wednesday, 23 May 2018

Brahma Kumaris Murli 24 May 2018 (HINDI) Madhuban BK Murli Today

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – 24 May 2018


24/05/2018 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
BK Murli is available to 'read' and to 'listen' Daily Murli in Hindi and English.'' Om Shanti. Shiv baba ke madhur Mahavakya. Brahma Kumaris BaapDada ki murli. Bk Murli Audio recorded by service team of sisters of bkdrluhar.com website


"मीठे बच्चे - देह सहित तुम्हारे पास जो कुछ भी है वह सब बलि चढ़ा दो फिर ट्रस्टी बन सम्भालो तो ममत्व निकल जायेगा"
प्रश्नः-
हरेक ब्राह्मण बच्चे को कौन-सी युक्ति जरूर सीखनी चाहिए?
उत्तर:-
सर्विस करने की युक्ति जरूर सीखो। शौक होना चाहिए कि कैसे सिद्ध कर बतायें - परमात्मा कौन है। तुम्हें बाप की श्रीमत मिली हुई है - सेन्सीबुल बन सबको बाप का पैगाम सुनाओ। ऐसे अच्छे-अच्छे पर्चे, कार्ड छपाओ जो मनुष्यों को पता पड़े कि परमात्मा को सर्व-व्यापी कहना उनकी इन्सल्ट करना है। तुम बच्चे तीर्थ यात्रियों की बहुत सर्विस कर सकते हो।
गीत:
जिसका साथी है भगवान.....  

Brahma Kumaris Murli 24 May 2018 (HINDI)
Brahma Kumaris Murli 24 May 2018 (HINDI) 

ओम् शान्ति।
बच्चों ने गीत सुना। बच्चे ही इसका अर्थ समझते हैं बाकी जिन्होंने गीत गाया वह इसका अर्थ कुछ भी नहीं समझते। न उन्हों के साथ भगवान है, न उन्हों को यह पता है कि भगवान कब आकर अपने बच्चों को स्वर्ग का वर्सा देते हैं। बाप ने ही आकर बच्चों को सम्मुख में अपना परिचय दिया है। वही बाप अब सम्मुख बैठे हैं और तुम सुनते हो। तुम ही त़ूफानों को समझते हो। वो लोग तो कैलेमिटीज़ आदि को तूफान समझ लेते हैं। यह तो 5 विकार रूपी माया के त़ूफान आते हैं। पुरुषार्थ में माया बहुत विघ्न डालती है। परन्तु उसकी परवाह नहीं करनी चाहिए। सिर्फ बाबा को अच्छी रीति याद करने से ही त़ूफान उड़ जाते हैं। बादशाह का बच्चा होगा, उनको यह निश्चय होगा कि हमारा बाबा बादशाह है। इस बादशाही का मैं मालिक हूँ। नशा रहता है। तुम बच्चों में भी कोई-कोई को ऐसा पक्का निश्चय है और बाप को अपना बनाया है। अपना बनाना कोई मासी का घर नहीं है। बस, मेरा तो एक शिवबाबा, दूसरा न कोई। बहुत बच्चे इन बातों को समझते नहीं हैं इसलिए माया के त़ूफान हैरान करते हैं और फिर बाप को ही छोड़ देते हैं। दुनिया में भगवान को यथार्थ रीति कोई नहीं जानते। तुम बच्चे असुल में शिवालय के रहने वाले थे। अब वेश्यालय है। इस समय मनुष्य बन्दर से भी बदतर बन गये हैं। मनुष्य का क्रोध बन्दर से भी तीखा है। मनुष्य होते भी ऐसा काम करते हैं इसलिए उनको बन्दर से भी बदतर कहा जाता है। भारतवासियों का सबसे बड़ा दुश्मन कौन है, जिसने उन्हों को बन्दर से भी बदतर बनाया है - यह कोई नहीं जानते। बाप कहते हैं तुम दिल रूपी दर्पण में अपनी शक्ल देखो। तुम पहले क्या थे! अब बाप तुमको लायक बनाते हैं। परन्तु जो श्रीमत पर नहीं चलते तो माया उनको नालायक बना देती है।

बाप श्रीमत देते हैं - देह सहित जो कुछ भी तुम्हारे पास है वह सब बलि चढ़ो। फिर तुमको ट्रस्टी बना देंगे। तुम्हारा ममत्व मिटा देंगे। तुम अबलाओं के लिए बहुत सहज है। राजस्थान के तऱफ राजाओं को अपने बच्चे नहीं होते हैं तो गोद लेते हैं। गरीब का बालक अगर साहूकार की गोद में जाता है तो कितना खुश होता है - हम इतनी प्रापर्टी के मालिक हैं! बड़े आदमियों के बच्चों को भी बहुत नशा रहता है कि हम करोड़पति के बच्चे हैं। इस ज्ञान का तो उनको पता ही नहीं है। तुम जानते हो कि इस ज्ञान में कितना भारी नशा रहता है! श्रीमत पर चलने से श्रेष्ठ बनेंगे, नहीं चलने से नहीं बनेंगे। भगवान कहते हैं तुमको तो कोई किस्म की परवाह ही नहीं। रात-दिन तुमको नशा रहना चाहिए कि हमको बाबा 21 जन्मों के लिए स्वर्ग की राजाई का वर्सा देते हैं। हम बाबा की सन्तान बने हैं। वास्तव में सब शिवबाबा की सन्तान हैं। परन्तु अब शिवबाबा आकर प्रैक्टिकल में अपना बच्चा बनाते हैं। अभी तुम सम्मुख बैठे हो, जानते हो शिवबाबा हमको अपना बनाकर स्वर्ग के लायक बनाने लिए मत देते हैं कि बच्चे, किसके नाम-रूप में नहीं फँसना है। एक शिवबाबा का नाम-रूप ही बुद्धि में रखना है। उनका नाम-रूप ही मनुष्यों से न्यारा है। बाप कहते हैं तुम हमारे थे, निर्वाणधाम में रहने वाले थे। क्या तुम भूल गए हो कि हम आत्मा परमधाम, शान्तिधाम अथवा निर्वाणधाम की रहने वाली हैं? हमारा स्वधर्म शान्त है। यह शरीर आरगन्स हैं कर्म करने के लिए। नहीं तो पार्ट कैसे बजायेंगे? हम आत्मा निराकारी दुनिया की रहवासी हैं - यह बिल्कुल नहीं जानते। यह सब बातें मनुष्य ही जानेंगे, जानवर थोड़ेही जानेंगे। परमात्मा को सर्वव्यापी कह दिया है तो खुद को भी भूल गये हैं कि हम आत्मा हैं। कहते हैं क्राइस्ट को, इब्राहम को परमपिता परमात्मा ने भेजा। तो जरूर कोई बाप है भेजने वाला। यह तो तुम जानते हो कि ड्रामा अनुसार हर एक आता रहता है। भेजने करने का तो सवाल ही नहीं उठता। इस समय मनुष्य अज्ञान अन्धेरे में हैं। न बाप को, न अपने को, न रचना को जानते हैं। मैं आत्मा हूँ, यह शरीर अलग है। हम आत्मा वहाँ से आये हैं - यह सब बातें बाबा ही याद दिलाते हैं। और बाप कहते हैं सभी को याद दिलाओ। तुम्हारा निमंत्रण बहुत अच्छा छपा हुआ है। शिव का चित्र भी है। यह बाबा, यह लक्ष्मी-नारायण है वर्सा। लिखा हुआ है परमपिता परमात्मा से आकर लक्ष्मी-नारायण जैसा बनने का वर्सा लो। तुम नर से नारायण बनने के स्टूडेन्ट हो। वह साहूकार आदि के बच्चे पढ़ते होंगे तो कितना खुश होते होंगे! परन्तु हमारे आगे तो वह कुछ भी नहीं है। अल्पकाल के सुख लिए मेहनत करते हैं। तुम बच्चे सदा सुख पाते हो। यह भी तुम ही कह सकते हो। कहाँ भी जाओ हाथ में निमंत्रण पत्र हो। बोलो, यह सभी आत्माओं का बाप स्वर्ग का रचयिता है, उनसे वर्सा कैसे मिलता है सो लिखा हुआ है। यह निमंत्रण एरोप्लेन से गिरा सकते हो। अखबार में भी डाल सकते हो। बड़े-बड़े को निमंत्रण मिल जायेगा। यह एरोप्लेन विनाश के लिए भी है तो तुम्हारी सर्विस के लिए भी है। यह काम गरीब तो कर न सकें परन्तु बाप है ही गरीब निवाज़। गरीब ही वर्सा पाते हैं। साहूकार तो ममत्व में फँसे हुए हैं। सरेन्डर होने में हृदय विदीर्ण होता है। कन्याओं-माताओं का इस समय ही भाग्य उदय होता है।

बाप कहते हैं इन माताओं द्वारा ही भारत का और साधू-सन्त, विद्वानों का उद्धार करना है। आगे चलकर वह सब आयेंगे। अभी वो लोग समझते हैं - हमारे जैसा कोई है नहीं। वह यह नहीं जानते कि गृहस्थ व्यवहार में रहते बाप ने राजयोग सिखाया है। उन्हों का हठयोग कर्म-सन्यास अलग है। भगवान तो जरूर आकर स्वर्ग का मालिक बनायेंगे। तो तुमको कितनी खुशी रहनी चाहिए! बाबा भक्ति में भी लक्ष्मी-नारायण के चित्र को बहुत प्यार से साथ में रखते थे। श्रीकृष्ण के चित्र को देख बहुत खुश होते थे। बाबा बच्चों को समझाते हैं कि अपना और दूसरों का कल्याण करना है तो सर्विस में लग जाओ। एम ऑबजेक्ट तो बहुत क्लीयर है। वर्सा है डीटी वर्ल्ड सावरन्टी। ऊपर शिवबाबा, नीचे लक्ष्मी-नारायण, कितना सहज है समझाना! तो सबको निमंत्रण देना है। बेहद के बाप से स्वर्ग का वर्सा जरूर मिलना है। जहाँ बहुत लोग जाते हैं वहाँ यह पर्चे जरूर फेंकने चाहिए। कोई कुछ कह नहीं सकता। अगर कोई कहे तो हम सिद्ध कर समझायेंगे कि बाप, जिससे स्वर्ग का वर्सा मिलता है, उनको तुम सर्वव्यापी कहते हो! बाप कहते हैं - देखो, यह मेरी इन्सल्ट करते हो! मैं स्वर्ग का मालिक बनाता, मुझे फिर भित्तर-ठिक्कर में डाल दिया है! अब तुम्हें श्रीमत मिलती है कि यह पर्चे खूब बाँटो। अमरनाथ की यात्रा पर झुण्ड जाता है - वहाँ जाकर बॉटो। इसमें लिखा हुआ है - यज्ञ, तप, तीर्थ आदि से मैं नहीं मिलता हूँ। परन्तु समझाने वाला सेन्सीबुल चाहिए। समझाना चाहिए वह है गॉड फादर। सिर्फ भगवान, ईश्वर, परमात्मा कहने से पिता अक्षर नहीं आता। गॉड फादर कहने से पिता अक्षर आता है। हम सभी एक फादर के बच्चे ठहरे। परमात्मा सर्वव्यापी है तो क्या परमात्मा पतित हो गया? वह तो है ऊंचे ते ऊंचा। उनका यादगार मन्दिर भी है। तो बच्चों को युक्ति से सर्विस करने का शौक चाहिए। यात्रा पर जाकर बहुत सर्विस कर सकते हो। वह है जिस्मानी यात्री, तुम हो रूहानी यात्री। समझाना चाहिए तुम कहाँ जाते हो। शंकर-पार्वती तो सूक्ष्मवतन में रहते हैं। यहाँ वह कहाँ से आये। यह सब है भक्तिमार्ग। तो ऐसे तुम बहुत सर्विस कर सकते हो। भक्त बिचारे बहुत धक्के खाते रहते हैं, तो उन पर तरस पड़ता है। उनको बोलो - तुम अपने धर्म को भूले हुए हो। हिन्दू धर्म किसने स्थापन किया? सर्विस तो बहुत है। बच्चों को खड़ा होना चाहिए। बाप आया है स्वर्ग का वर्सा देने फिर भी माया नाक से पकड़ एकदम मुंह फिरा देती है इसलिए माया से बहुत खबरदार रहना है। अभी तुम बच्चे बापदादा के सम्मुख बैठे हो। दुनिया को थोड़ेही मालूम है कि बाप सम्मुख आये हैं। सब आत्माओं की ज्योत बुझी हुई है। एकदम बुझ नहीं जाती है, थोड़ी लाइट रहती है। फिर बाबा आकर ज्ञान-घृत डालते हैं। जब कोई मरता है तो दीवा जगाते हैं। यहाँ योग से आत्मा की ज्योत जगाई जाती है। ज्ञान की धारणा करते रहते हैं। भारत का प्राचीन राजयोग मशहूर है। वह निवृत्ति मार्ग वाले तो अनेक प्रकार के हठयोग सिखलाते हैं। फायदा कुछ भी नहीं। नीचे गिरते ही जाते हैं। सिवाए योगेश्वर के कोई योग सिखला न सके। योग सिखलाने वाला है ईश्वर, वह है निराकार।

बाप कहते हैं तुमको अब योग सिखला रहा हूँ। अब तुम्हारा 84 का पार्ट पूरा हुआ। कोई के 84 जन्म, कोई के 60, कोई के एक दो जन्म भी होते हैं। तुम बच्चों को खूब सर्विस करनी है। भारत ही हेविन था। गॉड-गॉडेज का राज्य था। यह बातें तुम्हारे सिवाए कोई समझा न सके। गाली भी तुमको खानी पड़ती है। बाबा गाली खायेंगे तो क्या बच्चे नहीं खायेंगे। सितम सहन करेंगे। यह भी ड्रामा में नूँध है। फिर भी ऐसे ही होगा। अभी तुम बच्चों को पारस बुद्धि बनाता हूँ। ऐसे बाप को बहुत याद करना चाहिए - जो विश्व का मालिक बनाते हैं। कहते हैं बच्चे जीते रहो। स्वर्ग का राज्य लो। ऐसे मीठे-मीठे बाप को तुम याद नहीं कर सकते हो? याद से ही विकर्म विनाश होंगे। रहा हुआ पापों का खाता यहाँ चुक्तू करना है। अगर योग नहीं लगायेंगे तो सजा खानी पड़ेगी। उस समय बाबा साक्षात्कार भी कराते हैं - तुम हमारे बनकर फिर फारकती दे तुम ट्रेटर बन गये। तुमने शुरूआत में साक्षात्कार भी किया है। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे सदा सलामत बच्चों को मात-पिता का याद, प्यार और गुडमार्निंग। बच्चों को समझना है कि हम यह शरीर छोड़ स्वीट होम में जायेंगे। अब यहाँ रहने में ज़रा भी मजा नहीं है। अब हम बाबा के पास जाते हैं। बाबा को ही याद करना है। वहाँ से फिर स्वर्गधाम में जायेंगे। यह यात्रा बड़ी वन्डरफुल है, इसमें माया बहुत विघ्न डालती है। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद, प्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।


धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) एक शिवबाबा का नाम-रूप बुद्धि में रखना है और किसी के भी नाम-रूप में फँसना नहीं है।
2) माया के त़ूफानों की परवाह नहीं करनी है। मेरा तो एक शिवबाबा, दूसरा न कोई.... इस विधि से त़ूफान हटा देने हैं।
वरदान:-
सब व्यर्थ पों से मुक्त रह निर्विघ्न सेवा करने वाले अखण्ड सेवाधारी भव!
सेवा तो सब करते हैं लेकिन जो सेवा करते भी सदा निर्विघ्न रहते हैं, उसका बहुत महत्व है। सेवा के बीच में कोई भी प्रकार का विघ्न न आये। वायुमण्डल का, संग का, आलस्य का....यदि कोई भी विघ्न आया तो सेवा खण्डित हो गई। अखण्ड सेवाधारी कभी किसी विघ्न में नहीं आ सकते। जरा संकल्प मात्र भी विघ्न न हो। सब व्यर्थ पों से मुक्त रहो तब सफल और अखण्ड सेवाधारी कहेंगे।
स्लोगन:-
जो दिल और दिमाग से ऑनेस्ट हैं, वही बाप वा परिवार के प्यार के पात्र हैं।

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